वीरेंद्र कुमार/बिहारशरीफ, नालंदा। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में नालंदा जिला प्रशासन ने बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया है। इस विशेष अवसर पर बिहारशरीफ स्थित श्रम अधीक्षक कार्यालय के परिसर में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज को बच्चों के सुनहरे भविष्य और उनके अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना था।
सामूहिक संकल्प: बचपन बचाओ, देश बनाओ
कार्यक्रम का शुभारंभ नालंदा के श्रम अधीक्षक अश्वनी कुमार, आइडिया संस्था की निदेशक रागिनी कुमारी और अन्य प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति में हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बाल श्रम महज एक कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभिशाप है जो राष्ट्र की नींव यानी बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को कुचल देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक शिक्षित और सुरक्षित बचपन ही मजबूत भारत का निर्माण कर सकता है।

जागरूकता का संदेश: प्रभात फेरी और रथ यात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत एक भव्य प्रभात फेरी के साथ हुई, जिसने शहर की सड़कों पर गुजरते हुए आम नागरिकों को बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में सचेत किया। इसके बाद, अधिकारियों ने संयुक्त रूप से एक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर लोगों को बाल श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों, सरकारी पुनर्वास योजनाओं और बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा।
सामुदायिक सहभागिता की अपील
अधिकारियों ने आम जनमानस से अपील की कि वे निगरानीकर्ता की भूमिका निभाएं। यदि किसी भी कार्यस्थल, होटल या प्रतिष्ठान में बच्चों से काम कराया जा रहा हो, तो इसकी तत्काल सूचना संबंधित विभाग को दें। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सूचना देने वालों की गोपनीयता बनाए रखी जाएगी और दोषी पाए जाने वाले नियोक्ताओं पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस आयोजन में प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से नियोजन पदाधिकारी मो. अकिफ, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (चंडी) प्रिंस कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुमन कुमार, पूर्व एमएलसी राजकुमार सिंह और बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष पुष्पा पांडे उपस्थित रहे। साथ ही, आइडिया संस्था से मंटू कुमार, उज्ज्वल कुमार गंगोत्री समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का आह्वान
कार्यक्रम के अंतिम चरण में, उपस्थित सभी अधिकारियों, स्वयंसेवकों और नागरिकों ने बाल श्रम मुक्त समाज बनाने की शपथ ली। इस दौरान यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बच्चे का स्थान फैक्ट्रियों या ढाबों के बजाय विद्यालय की कक्षा में है। आयोजन का समापन इस सामूहिक प्रतिज्ञा के साथ हुआ कि नालंदा को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे और हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

