वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिला अंतर्गत रहुई प्रखंड के मध्य विद्यालय दोसूत में आधारभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जर्जर स्कूल में कुल 467 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और प्रधानाध्यापक सहित 11 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। कुल 11 कमरों में से दो वर्ग की कक्षा काफी जर्जर अवस्था में हैं।

हर दिन बना रहता है दुर्घटना का खतरा

स्कूल के भवन की दीवारों में दरारें और कमजोर छत के कारण हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बारिश के दौरान हालात और अधिक चिंताजनक हो जाते हैं। छात्र-छात्राओं का कहना है कि जर्जर भवन देखकर उन्हें हमेशा डर लगा रहता है और पढ़ाई पर भी इसका असर पड़ता है।

प्रधानाध्यापक ने क्या कहा?

प्रधानाध्यापक हीरालाल पासवान ने बताया कि जर्जर कमरों में बच्चों को पढ़ाना उनकी सुरक्षा के साथ समझौता है। इस संबंध में जिला स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से तत्काल तकनीकी जांच, जर्जर कमरों की मरम्मत तथा आवश्यकता पड़ने पर नए भवन के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी संभावित हादसे से पहले प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

सुरक्षित व्यवस्था करने की मांग

यदि समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से अविलंब स्थल निरीक्षण कर सुरक्षित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

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