वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के अस्थावां नगर पंचायत में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा किए जा रहे विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच जमीन और आसमान का अंतर देखने को मिलता है। करीब 20 वर्षों से बाजार से गुजरने वाले सिंचाई नहर अतिक्रमण की गिरफ्त में है। कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। इसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
50 बीघा खेत जलमग्न, फसल बर्बाद
आलम यह है कि जेठ की भीषण गर्मी में भी वार्ड संख्या-3 स्थित तालाब क्षेत्र के करीब 50 बीघा खेत जलमग्न हैं। जलनिकासी बाधित होने के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो रही है और कई परिवार कर्ज लेकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। कुछ किसानों ने तो रोजगार की तलाश में बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करने की बात भी कही है।
सड़क किनारे छोड़ गया कचरा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से नहीं होती है। छोटे लोगों पर कार्रवाई होती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कब्जे आज भी बरकरार हैं। हाल ही में सिंचाई नहर की सफाई के दौरान निकाली गई गाद (कचड़ा व गंदगी) को सड़क किनारे छोड़ दिया गया, जिससे दुर्गंध और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।
स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग
स्थानीय किसान केदार यादव, उपेंद्र यादव, डरो यादव, अश्लोक यादव, छोटानी चौधरी, रामोतार यादव, सरयुग यादव, रमेश यादव, सतीश यादव, बिंदा यादव और दिनेश यादव समेत सैकड़ों किसानों ने प्रशासन से जल्द अतिक्रमण हटाने और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। अब अस्थावां की जनता पूछ रही है कि आखिर अतिक्रमण का यह किला कब टूटेगा और किसानों को उनकी जमीन का हक कब मिलेगा?
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