दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व वन्यजीवों के संरक्षण और उनके कुनबे को बढ़ाने की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है। बुधवार शाम मटकुली के पास स्थित धारागांव के विशेष बाड़े में 15 बारहसिंगों को सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इनमें 12 मादा और 3 नर हैं।
बारहसिंगों को बोरी अभ्यारण्य से अत्याधुनिक बोमा तकनीक के जरिए पकड़ा गया था। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में इन्हें ट्रकों के माध्यम से सुरक्षित धारागांव ले जाया गया। बाड़े में छोड़ते ही बारहसिंगों का झुंड उत्साह के साथ उछल-कूद करता नजर आया। विभाग के अनुसार, इन्हें कुछ महीनों तक इसी बाड़े में पानी और हरियाली के बीच रखा जाएगा, ताकि वे नए परिवेश में ढल सकें, इसके बाद इन्हें खुले जंगल में आजाद कर दिया जाएगा।
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एसटीआर में वन्यजीवों की संख्या संतुलित करने के लिए पिछले 6 वर्षों से पेंच और कान्हा नेशनल पार्क से जानवरों को लाने का सिलसिला जारी है। अब तक लगभग 1800 चीतलों को यहां बसाया जा चुका है। लगभग 120 बारहसिंगा अब तक यहां लाए गए हैं। विभाग का लक्ष्य करीब 3 हजार वन्यजीवों को यहां पुनर्वासित करना है।
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अधिकारियों का कहना है कि बोरी क्षेत्र में बारहसिंगों की संख्या पर्याप्त हो चुकी है, इसलिए अब धारागांव में इनकी बसावट बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यहां की लंबी घास, अनुकूल रहवास और विचरण के लिए बड़ा क्षेत्र वन्यजीवों के लिए आदर्श है। इस पहल से न केवल जैव-विविधता बढ़ेगी, बल्कि यह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेगा।

