दिल्ली सरकार राजधानी की सड़कों पर खुले में घूमने वाली आवारा और बेसहारा गायों की समस्या के समाधान के लिए नई योजना पर काम कर रही है। इस मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान विस्तार से चर्चा हुई, जहां जनप्रतिनिधियों ने इसे सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया। विधानसभा में विधायक श्याम शर्मा ने नियम 280 के तहत यह मामला उठाते हुए कहा कि राजधानी में आवारा और बेसहारा गायों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, इस समस्या से निपटने के लिए एमसीडी ने किरारी, घोघा और भलस्वा क्षेत्रों में जमीन की पहचान की है। भविष्य में इन स्थलों का उपयोग आवारा और बेसहारा गायों के पुनर्वास, रखरखाव या संबंधित सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है। घोघा और भलस्वा में प्रोसेसिंग प्लांट से जुड़े कार्य पहले से प्रगति पर हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन परियोजनाओं और उपलब्ध भूमि का उपयोग पशु प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम या औपचारिक योजना तैयार नहीं की गई है। संबंधित विभाग विभिन्न विकल्पों और संभावित मॉडल पर विचार कर रहे हैं।
अगले हफ्ते समिति की बैठक की उम्मीद
अधिकारियों के अनुसार, विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद अब इसे आगे बढ़ाने के लिए एमसीडी समिति के स्तर पर चर्चा की जाएगी। बैठक में आवारा गायों की पहचान, उनके सुरक्षित पुनर्वास और उपलब्ध जमीन के इस्तेमाल समेत विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। एमसीडी ने इस समस्या से निपटने के लिए किरारी, घोघा और भलस्वा में जमीन की पहचान की है। हालांकि, इन स्थानों के इस्तेमाल को लेकर अभी अंतिम योजना तैयार नहीं हुई है। घोघा और भलस्वा में प्रोसेसिंग प्लांट से जुड़े काम पहले से चल रहे हैं।
सीएम रेखा गुप्ता ने पहले ही किया था ऐलान
आवारा गायों की देखभाल और उनके लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में दिल्ली सरकार पहले ही बजट प्रावधान कर चुकी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मार्च में गायों की देखभाल और 10 आधुनिक गौशालाओं के निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी थी। सरकार का उद्देश्य आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौशालाएं विकसित करना है, ताकि सड़कों पर बेसहारा घूमने वाले पशुओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सके और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी मौजूदगी से होने वाली समस्याओं को कम किया जा सके।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली सरकार का विकास विभाग पशुपालन निदेशालय के माध्यम से गायों की देखभाल और मान्यता प्राप्त गौशालाओं यानी गोसदनों की निगरानी करता है। फिलहाल सरकार 110 एकड़ क्षेत्र में फैले पांच गोसदनों की देखरेख कर रही है। इन गोसदनों में 23 हजार से अधिक आवारा पशुओं की देखभाल की क्षमता बताई गई है। एमसीडी के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में रोजाना करीब 1,500 टन बिना प्रोसेस किया हुआ मवेशी कचरा निकलता है, जबकि इसमें से सिर्फ 200 टन कचरे का ही प्रोसेसिंग हो पा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बाकी कचरे के निस्तारण को लेकर भी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।
नांगली डेयरी में फिलहाल एक प्लांट
वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की नांगली डेयरी में मवेशियों के कचरे को प्रोसेस करने की सुविधा उपलब्ध है। अधिकारियों के मुताबिक, इसी सुविधा के जरिए प्रतिदिन करीब 200 टन कचरे का प्रोसेसिंग किया जा रहा है। मवेशियों की संख्या और उनसे निकलने वाले कचरे को देखते हुए एमसीडी अब दिल्ली के अलग-अलग इलाकों और डेयरी कॉलोनियों में नए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की योजना बना रही है। घोघा, गोयला और इंदिरा पार्क में प्रतिदिन 200 टन क्षमता वाले कचरा प्रोसेसिंग प्लांट प्रस्तावित हैं। वहीं गाजीपुर डेयरी में 300 टन और भलस्वा डेयरी में 125 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लांट लगाने की योजना है। इसके अलावा मसूदपुर डेयरी, रोहिणी के इंदिरा कैंप, खजूरी स्थित श्रीराम कॉलोनी और सरिता विहार में भी प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाने का प्रस्ताव है। इन प्लांटों की क्षमता 50 से 100 टन प्रतिदिन के बीच रखी जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 1.27 लाख मवेशी होने का अनुमान है। इनमें लगभग 84 हजार मवेशी कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त डेयरी कॉलोनियों में रखे गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकारी गौशालाओं में करीब 23,980 मवेशी, जबकि निजी गौशालाओं में लगभग 21 हजार मवेशी रखे गए हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मवेशियों के कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए पर्याप्त प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना जरूरी माना जा रहा है।
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