दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। नर्मदापुरम की लाइफलाइन कहे जाने वाले ऐतिहासिक तवा पुल पर रेत माफिया के लालच के कारण एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। साल 1982 से मजबूती से खड़ा यह पुल अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। पुल के तीन मुख्य पिलर के डेक स्लैब में गंभीर दरारें आने की जानकारी सामने आई है। जिसके बाद से मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

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16 जून की शाम तक भारी वाहनों की एंट्री पर पूरी तरह रोक

पुल की खतरनाक स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत आपातकालीन कदम उठाए हैं। तवा पुल से डंपरों और सभी प्रकार के भारी लोडिंग वाहनों की एंट्री पर 16 जून की शाम 6 बजे तक के लिए पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्थिति को संभालने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है।

लंबे रास्तों का चक्कर काटने को मजबूर भारी वाहन

पुल पर प्रतिबंध लागू होने के बाद भारी वाहनों के रूट को डायवर्ट किया गया है। अब सभी भारी और लोडिंग वाहनों को माखन नगर, सांगाखेड़ा कला और बांद्राभान के लंबे रास्तों से होकर चक्कर काटते हुए अपने गंतव्य तक जाना होगा। इस वजह से चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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नियमों को ताक पर रखकर निकाली अंधाधुंध रेत

शुरुआती जांच में जो सच सामने आया है उसने प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। खुलासे के मुताबिक पुल की सुरक्षा के लिए निर्धारित 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर अंधाधुंध अवैध रेत खनन किया गया। रेत माफिया द्वारा नदी के सीने को छलनी करने की वजह से ही पुल की नींव बेहद कमजोर हो गई और पिलरों में दरारें आ गईं। अब इस ऐतिहासिक पुल के अस्तित्व पर ही बड़ा संकट मंडरा रहा है।

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