राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में श्री महाकालेश्वर मंदिर में उज्जैन स्मार्ट सिटी के “त्रिनेत्र” प्रोजेक्ट को स्वर्ण पुरस्कार मिला है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस पर हर्ष जताते हुए कहा इसे गौरव का विषय बताया। सीएम ने कहा कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के लिए जल्द MoU किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, उज्जैन का एआई मॉडल अब अखिल भारतीय स्तर पर लागू होगा। उज्जैन का “त्रिनेत्र” मॉडल शहरों की सुरक्षा एवं स्मार्ट निगरानी व्यवस्था का आधार बनेगा। डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, भारत सरकार और उज्जैन के ‘त्रिनेत्र’ प्रोजेक्ट को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने के लिये जल्द एक एमओयू होगा। सुरक्षा के AI मॉडल त्रिनेत्र से सुरक्षा, तुरंत आपात सहायता और सुगम दर्शन ने श्रद्धालुओं में विश्वास पैदा किया, जिससे सालाना श्रद्धालु 1.5 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025 में 8 करोड़ से भी अधिक हो गए। रोज का आगमन 20-30 हजार से बढ़कर 2 लाख से भी अधिक हो गया और त्योहारों पर 8 से 10 लाख तक पहुंच गया।

सीएम ने आगे कहा कि त्रिनेत्र से होने वाले सुगम प्रबंधन से मंदिर का राजस्व 46 करोड़ से बढ़ कर 280 करोड़ तक पहुंच गया है। त्रिनेत्र न केवल प्रत्यक्ष अपितु परोक्ष रूप से भी मंदिर के राजस्व वृद्धि में योगदान दे रहा है। 8 से 10 लाख की भीड़ वाले त्योहार भी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुए। श्रावण 2025 में 1.5 से 2 करोड़ श्रद्धालु बिना किसी अनहोनी के दर्शन कर लौटे। पिछले 45 दिनों में स्मार्ट चेहरा पहचान प्रणाली से 552 लापता व्यक्ति अपने परिवारों से मिल गए। भीड़ में खोए बच्चे, बुज़ुर्ग और महिलाएं मात्र 25 से 40 मिनट में अपनों तक पहुंच गए। 53 खोई हुई वस्तुएं असली मालिकों को लौटाई गईं, 10 चोरी की घटनाओं में मौके पर ही चोर पकड़े गए और सामान बरामद हुआ और 7 पुलिस मामलों में TRINETRA की वीडियो से पुख्ता सबूत मिले।
भारी भीड़ के बीच भी दर्शन का समय मात्र 15 से 20 मिनट प्रति श्रद्धालु हो गया है क्योंकि भीड़ का पहले से अनुमान लगाकर कतारों को व्यवस्थित किया जाने लगा है। त्रिनेत्र मॉडल से अब स्मार्ट कैमरों और तत्काल भीड़ चेतावनी प्रणाली से भीड़ की हर हलचल पहले से देखी जा सकती है, जिससे क्राउड मैनेजमेंट आसान हुआ है। त्रिनेत्र AI मॉडल से मंदिर को हर साल लगभग 8 करोड़ 60 लाख रुपये की बचत हो रही है। निगरानी के लिए 150 अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता कम हुई है।
साथ ही त्योहारों पर तैनात होने वाले अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता भी कम हुई है। इस से 5 करोड़ 25 लाख के निवेश की भरपाई मात्र 7 महीनों में हो गई, और 5 वर्षों में लगभग 43 करोड़ रुपये की बचत होगी। अब स्मार्ट गिनती प्रणाली से श्रद्धालुओं की गिनती आसान हो गई है। 450 से अधिक स्मार्ट कैमरे एक साथ दस अलग-अलग निगरानी कार्य करते हैं। भीड़ की गिनती, चेहरा पहचानना, संदिग्ध हरकत भांपना, कैमरे से छेड़छाड़ पकड़ना, अनजान वस्तु देखना आदि जिससे संचालन कक्ष के कर्मचारियों पर बोझ घटा और खतरे को पहचानने की क्षमता मैनुअल 15 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत हो गई।
यातायात और पार्किंग की व्यवस्था स्मार्ट हो गई। पर्यटक वाहन, ई-रिक्शा, विशेष वाहन अलग-अलग पहचाने जाते हैं, जिससे मंदिर क्षेत्र में जाम कम हुआ और विशेष दर्शन के आवागमन का रास्ता सुगम हुआ।
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