रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. अमेठी से लोकसभा सांसद किशोरी लाल शर्मा (केएल शर्मा) के खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज अपमान का वर्ष 2012 का मुकदमा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. स्थानीय अदालत ने पुलिस की गंभीर लापरवाही और केस डायरी गायब होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी को सख्त निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

याची शकील अहमद खान ने 11 अगस्त 2012 को सदर कोतवाली रायबरेली में केएल शर्मा समेत आधा दर्जन कांग्रेस नेताओं पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का मुकदमा दर्ज कराया था. इस एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे. 23 दिसंबर 2016 को कोर्ट ने अग्रिम विवेचना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन पूरे 9 वर्ष बीत जाने के बावजूद विवेचना की केस डायरी अदालत में पेश नहीं की गई. जब न्यायालय की अवमानना पर जवाब मांगा गया तो वर्तमान शहर कोतवाल शिव शंकर सिंह ने केस डायरी गायब होने और विवेचना से संबंधित किसी भी दस्तावेज न होने का हवाला दिया.

इसे भी पढ़ें : एक बार कह दो जरूरत नहीं…बृजभूषण सिंह का बड़ा बयान, कहा- 2027-29 चुनाव में दिखा देंगे हमारी उपयोगिता

एसीजेएम प्रथम निहारिका जायसवाल ने पूर्व आदेशों के अनुपालन न होने पर सख्त टिप्पणी की. इसके बाद 18 मार्च 2026 को एसीजेएम प्रथम अनीशा के आदेश जारी हुए, लेकिन उनका भी पालन नहीं हुआ. अब अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने कड़ा आदेश पारित किया है. कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे केस डायरी गायब करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसपी के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराएं और उन पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें. अदालत ने स्पष्ट कहा कि पुलिस की इस उदासीनता और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कोर्ट के इन सख्त आदेशों के बाद रायबरेली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.