आज केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है. इस हड़ताल से देश के कई हिस्सों में दवाओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) और नकली दवाओं के कारोबार के विरोध में AIOCD के देशव्यापी आह्वान पर देश की सभी मेडिकल दुकानें बंद हैं. ऑनलाइन कंपनियों की ओर से दवा की डोर-टू-डोर सप्लाई के खिलाफ देशभर की दवा दुकान 20 मई 2026 को एकदिवसीय बंदी पर रहेंगे.

दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री और बड़ी कंपनियों के कॉम्पिटीशन के विरोध में देशभर के 15 लाख से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने बुधवार को बंद का ऐलान किया है।

AIOCD ने कहा था कि बंद के दौरान भी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे। इमरजेंसी दवाओं की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आने दी जाएगी।

दवा दुकानदारों ने 4 मांगें रखी है–

बिना नियमों के चल रही ऑनलाइन दवाओं की बिक्री से मोहल्ले की छोटी दुकानों को नुकसान हो रहा है और लोगों की सेहत के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। इसे रोका जाए।

इस पूरे विवाद से जुड़े सरकार के दो नियम GSR 220(E) और GSR 817(E) हैं। संगठन के मुताबिक इन नियमों की कमियों का फायदा उठाकर ही ऑनलाइन दवा कंपनियां ऐसा कर रही हैं। इसे वापस लिया जाए।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ‘गलत या नकली पर्चियों’ का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए ई-फार्मेसी के लिए नए सख्त नियम बनाए जाएं।

लोकल दुकानदार ऑनलाइन कंपनियों के 20% से 50% तक के डिस्काउंट का मुकाबला नहीं कर सकते।

कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत सरकार ने लॉकडाउन में लोगों तक जरूरी दवाइयां पहुंचाने के लिए ई-फार्मा स्टोर्स (ऑनलाइन मेडिकल स्टोर्स) को कई बड़ी रियायतें दी थीं। सरकार ने ई-फार्मा को आवश्यक सेवा का दर्जा दिया, जिससे लॉकडाउन में भी उनकी डिलीवरी बिना रोक-टोक जारी रही।

घर-घर जाकर दवाइयां पहुंचाने की प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया ताकि लोग अस्पतालों या मेडिकल स्टोर पर भीड़ लगाने के बजाय सुरक्षित तरीके से घर बैठे ही अपनी रेगुलर और जरूरी दवाइयां मंगा सकें।

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