Navratri 2025: भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल, राजस्थान के करौली स्थित कैलादेवी मंदिर में नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। लेकिन इस मंदिर की एक विशेष परंपरा ऐसी है, जिसके लिए भक्तों को डेढ़ साल तक इंतजार करना पड़ता है। यह परंपरा छप्पन भोग (56 भोग) चढ़ाने की है।

छप्पन भोग की बुकिंग 2026 तक फुल
करीब 300 साल पुराना यह मंदिर न सिर्फ ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि यहाँ रोज़ाना 56 भोग चढ़ाने की परंपरा भी वर्षों से जारी है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, इस साल छप्पन भोग की बुकिंग करवाने वाले भक्तों की बारी 2026 में आएगी, यानी उन्हें 15 महीनों से अधिक इंतजार करना होगा।
क्या है 56 भोग की खासियत?
यह परंपरा राजघरानों के समय से चली आ रही है। भक्त माता कैलादेवी को देशी घी से बनी 20-25 तरह की मिठाइयां, 10-12 प्रकार की नमकीन, 5-7 प्रकार का मावा, मौसमी फल, और अन्य पके व कच्चे भोजन अर्पित करते हैं। भोग के साथ हवन और वस्त्र अर्पण की विधि भी होती है।
नवरात्रि में नहीं होता 56 भोग का आयोजन
मंदिर ट्रस्टी कृष्ण चंद पाल और निदेशक विवेक द्विवेदी ने बताया कि चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि और कैलादेवी लक्खी मेले के दौरान 56 भोग और फूल बंगला का आयोजन स्थगित रहता है, क्योंकि इन दिनों मंदिर में विशेष देवी अनुष्ठान होते हैं।
फूल बंगला सजाने में माहिर हैं यूपी के कारीगर
कैलादेवी मंदिर की एक और खास पहचान है फूल बंगला। माता के दरबार को हर दिन फूलों से सजाया जाता है। यह सजावट उत्तर प्रदेश से आए विशेष कारीगरों द्वारा की जाती है, जो वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
क्यों है यह मंदिर इतना खास?
कैलादेवी मंदिर केवल करौली ही नहीं, बल्कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी गहरी आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है और इसी विश्वास के चलते भक्त सालों तक अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
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