हेमंत शर्मा, इंदौर। NEET UG री-एग्जाम के बीच इंदौर में परीक्षा व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। इसी कड़ी में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा का सख्त और संवेदनशील दोनों रूप देखने को मिला। SGSITS परीक्षा केंद्र पर निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को एक छात्रा आधार कार्ड से जुड़ी समस्या के कारण परेशान और रोती हुई मिली। छात्रा की हालत देखकर कलेक्टर तुरंत उसके पास पहुंचे और पूरी जानकारी ली।

मामले की गंभीरता समझते ही कलेक्टर ने वहां मौजूद हेल्प डेस्क और नोडल अधिकारियों से जवाब तलब किया। छात्रा की समस्या का समाधान कराने के साथ ही उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर किसी भी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

खुद बने अभ्यर्थी, तीन मिनट में परखा पूरा सिस्टम

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा ने सिर्फ निर्देश देकर औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि खुद को एक अभ्यर्थी मानकर हेल्प डेस्क की व्यवस्था का परीक्षण किया। उन्होंने फोटो और दस्तावेज उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया को मौके पर ही चेक किया। कलेक्टर ने कर्मचारियों से कहा कि यदि कोई छात्र दस्तावेज या फोटो से जुड़ी समस्या लेकर आता है तो उसे कितनी जल्दी मदद मिल सकती है, यह दिखाकर बताएं। इसके बाद महज तीन मिनट के भीतर फोटो का प्रिंट निकालकर दिखाया गया। कलेक्टर ने पूरी प्रक्रिया की गति और कार्यप्रणाली को खुद परखकर देखा।

‘छात्रों को परेशान किया तो सीधे होगी कार्रवाई’

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि किसी भी छात्र या छात्रा को दस्तावेज, फोटो या अन्य तकनीकी कारणों से परीक्षा देने में दिक्कत हुई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर बनाई गई हेल्प डेस्क का उद्देश्य अभ्यर्थियों की मदद करना है, न कि उन्हें इधर-उधर भटकाना। सभी व्यवस्थाएं ऐसी हों कि किसी छात्र का भविष्य प्रशासनिक लापरवाही की भेंट न चढ़े।

अभिभावकों से भी लिया फीडबैक

कलेक्टर ने परीक्षा केंद्र पर मौजूद छात्रों और उनके अभिभावकों से भी सीधे बातचीत की। उन्होंने व्यवस्थाओं के बारे में फीडबैक लिया और पूछा कि कहीं किसी प्रकार की असुविधा तो नहीं हो रही। प्रशासन की ओर से किए गए इंतजामों का भी जायजा लिया गया। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के दौरान इंदौर कलेक्टर का यह औचक निरीक्षण यह संदेश देता है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और व्यवस्था में कमी मिलने पर जिम्मेदारों को जवाब देना होगा।

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