नेपाल और तिब्बत सीमा के पास अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए गुजरात और भारतीय मूल के NRI (गैर-आवासीय भारतीयों) तीर्थयात्रियों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) द्वारा जारी सूची के अनुसार, लापता लोगों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। इनमें अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में बसे ऐसे कई NRI शामिल हैं, जिनके तार गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, वलसाड, सूरत, वड़ोदरा और आणंद जैसे शहरों से जुड़े हैं।
मुंबई की ‘हिल्स एंड ट्रेल्स’ ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से गए लगभग 56 यात्रियों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। राजकोट के वायरल नाथवानी ने बताया कि उनके कज़िन जय कोटेचा और वलसाड की रोमा इंटवाला का बुधवार को फ्रेंडशिप ब्रिज के पास इमिग्रेशन बिल्डिंग की ओर जाते समय आखिरी संदेश आया था। तबाही के भयानक दृश्यों के बीच भी परिजन उम्मीद का दामन थामे हुए हैं।
वड़ोदरा के चिराग पटेल रक्षाबंधन के मौके पर न्यूज़ीलैंड से आई अपनी बहन किन्नरी और बहनोई मिहिर पटेल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। चिराग ने भावुक होकर कहा, “मैं भगवान शिव से बस यही प्रार्थना कर रहा हूं कि वे दोनों सुरक्षित लौट आएं।”
वहीं, कुछ परिवारों को उम्मीद है कि यह कोई अनहोनी नहीं, बल्कि दुर्गम पहाड़ी इलाके में खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी का नतीजा है। अमेरिका से आए परेश पटेल, उनकी पत्नी ज्योति और बहन मीनाक्षी ने इमिग्रेशन के वक्त परिजनों को नेटवर्क न होने की संभावना जताई थी।
तबाही के खौफनाक मंजर के बीच, भारत में मौजूद परिवार दिन-रात प्रार्थनाएं कर रहे हैं और अपनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं।
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