जुबैर अंसारी/सुपौल। भारत-नेपाल सीमा पर इंसानियत की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मानवता सरहदों और सीमाओं से परे होती है। सुपौल जिले के बीरपुर अनुमंडल क्षेत्र में कोसी नदी में बहते एक नेपाली नागरिक को स्थानीय मछुआरों ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से मौत के मुंह से खींच लिया। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
नेपाल के चितवन निवासी 45 वर्षीय गोविंद प्रसाद भूसाल अपने निजी कार्यों से इलाम जा रहे थे। रास्ते में वे एक शातिर नशा गिरोह के चंगुल में फंस गए। अपराधियों ने उन्हें बातों में उलझाकर नशीला पदार्थ खिला दिया जिससे वे अचेत हो गए। इसके बाद बदमाशों ने गोविंद के पास मौजूद दस हजार रुपये की नकदी, मोबाइल और कीमती सामान लूट लिए। हैवानियत की हद तो तब हो गई जब बदमाशों ने उनके कपड़े तक उतार लिए और उन्हें मृत समझकर पूर्वी कोसी तटबंध के स्पर संख्या 5 और 30 के बीच कोसी नदी की तेज धार में फेंक दिया।
मछुआरों की सतर्कता और जाको राखे साइयां
कहते हैं कि जाको राखे साइयां मार सके न कोय, यह कहावत उस समय चरितार्थ हुई जब नदी की लहरों में बह रहे गोविंद पर कुछ स्थानीय मछुआरों की नजर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए अपनी नाव के सहारे गोविंद को पानी से बाहर निकाला। उस समय गोविंद की हालत बेहद नाजुक थी। मछुआरों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और एसएसबी (SSB) के जवानों को दी। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत बीरपुर स्थित अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया।
अस्पताल में मिली नई जिंदगी
बीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने गोविंद का प्राथमिक उपचार किया। समय पर इलाज मिलने के कारण उनकी जान बच गई। होश में आने के बाद गोविंद ने भावुक होकर भगवान का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने उन भारतीय मछुआरों और प्रशासन के प्रति भी गहरा आभार प्रकट किया, जिन्होंने एक अजनबी होने के बावजूद उन्हें नया जीवन दान दिया। उन्होंने कहा, मैं भारतीयों के इस प्यार और मदद को जीवन भर नहीं भूलूंगा। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है ताकि उस नशा गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके जिसने इस वारदात को अंजाम दिया। यह घटना सीमावर्ती इलाकों में यात्रियों की सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

