इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे की न्यायिक जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सिस्टम की रूह कंपा देने वाली लापरवाहियां उजागर हो रही हैं। 30 अप्रैल की शाम को हुए इस भीषण हादसे में 13 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। अब इस मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के सामने एक ऐसा चौंकाने वाला वीडियो सबूत पेश किया गया है, जिसने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन विभाग को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।

प्रत्यक्षदर्शी का दावा: ‘पानी से निकालने पर चल रही थी सांसें’

हादसे के वक्त मौके पर मौजूद और बचाव कार्य में मसीहा बनकर जुटे बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष उपस्थित होकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। नीरज मिश्रा ने आयोग को 14 बिंदुओं पर आधारित एक शिकायती पत्र और एक पेन ड्राइव सौंपी है।

नीरज मिश्रा का दावा है कि जब क्रूज पानी में डूबा, तो स्थानीय लोगों की मदद से कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। इनमें से कुछ लोगों की सांसें चल रही थीं और उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार (First Aid) की जरूरत थी। मौके पर 108 एंबुलेंस भी समय पर पहुंच गई थी लेकिन एंबुलेंस में ड्राइवर के अलावा कोई भी डॉक्टर, कंपाउंडर, अटेंडर या मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था।

नीरज ने दावा किया कि मेडिकल स्टाफ न होने की वजह से तड़पते हुए घायलों को मौके पर कोई प्राथमिक उपचार नहीं मिला, जो कई लोगों की मौत की वजह बना। इस लापरवाही का वीडियो सामने आने के बाद जांच आयोग ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों को कड़ा नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जो उन्हें 60 दिन के भीतर सरकार को सौपनी है।

हादसे के बाद भी नहीं चेते अफसर, 10 किमी का बांध सिर्फ 4 जवानों के भरोसे!

इस क्रूज हादसे में 13 मासूम जिंदगियां खत्म होने के बाद भी प्रशासनिक अमला सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तकरीबन 8 से 10 किलोमीटर के विशाल दायरे में फैले बरगी बांध की सुरक्षा वर्तमान में महज 4 सुरक्षाकर्मियों के भरोसे छोड़ दी गई है।

हैरानी की बात यह है कि जब यह बांध बनकर तैयार हुआ था, तब यहां 14 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते थे। लेकिन वक्त के साथ संवेदनशीलता बढ़ने के बावजूद सुरक्षा घटाकर सिर्फ 4 जवानों की कर दी गई। इतने बड़े और मशहूर पर्यटन स्थल पर सुरक्षा के इन खोखले इंतजामों को लेकर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और पर्यटन विभाग के अधिकारियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

CISF तैनाती की मांग तेज, भोपाल भेजा गया आपातकालीन प्रस्ताव

लापरवाही उजागर होने के बाद अब स्थानीय लोगों और पर्यटकों में भारी आक्रोश है। बांध की संवेदनशीलता और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए यहां सीआईएसएफ की स्थायी तैनाती की मांग तेज हो गई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को इसका औपचारिक प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

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