Unified Payments Interface (UPI) एक ऐसा प्रणाली है जिसकी मदद से भेजनेवाला या फिर प्राप्तकर्ता तुरंत किसी भी बैंक अकाउंट में पैसा भेज या फिर प्राप्त करता है. अभी के डिजिटल दौर में हर कोई UPI से पेमेंट करना पसंद कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कैश रखने की टेंशन नहीं होती है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में यूपीआई लेनदेन संख्या अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.
अगस्त के महीने में लोगों ने 29.82 लाख करोड़ का लेने-देन किए. UPI पेमेंट का इस्तेमाल भी लगातार बढ़ता नजर आ रहा है. एक अनुमान के तहत अगस्त के महीने में डिजिटल लेनदेन में आई इस तेजी का मुख्य कारण रक्षाबंधन जैसे त्योहार रहे.
अगस्त के ये शानदार आर्थिक आंकड़े इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि भारतीय बाजार में मांग बेहद मजबूत बनी हुई है। दो लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह और करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये का मासिक यूपीआई लेनदेन डिजिटल क्रांति के गहरे प्रभाव को भी उजागर करता है.
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट की है, जिसमें जुलाई-अगस्त में हुई लेन-देन के आंकड़े जारी किए हैं. जुलाई के आकंड़ों की बात करें तो इस महीने UPI के जरिए 29.88 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ.
वहीं अगस्त में पूरे महीने में UPI के जरिए 29.88 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ. जो एक साल पहले इसी महीने के 24.85 लाख करोड़ रुपये से 20% अधिक है.
भारतीयों की पसंदीदा भुगतान प्रणाली यूपीआई अब दुनिया भर के 11 देशों में स्वीकार की जा रही है. यह सेवा साल के 365 दिन, 24 घंटे सातों दिन काम करती है. सामान्य व्यक्तिगत (P2P) लेनदेन के लिए यह पूरी तरह से मुफ्त है.
यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त, 2016 को हुई और तब से इसने भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को बदल दिया है. इसका लेनदेन मूल्य वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी एक दशक में इसमें 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है.
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