केंद्र सरकार ने चीनी की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी तथा सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों की स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा आधी कर दी है. अभी यह सीमा 4,000 क्विंटल है जो 1 अगस्त 2026 से लागू है. ऐसे में त्योहारों से पहले चीनी सस्ती होने की संभावना है.

केंद्र सरकार ने जमाखोरी रोकने और त्योहारों से पहले कीमतें काबू करने के लिए चीनी डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट घटाने का ऐलान किया है.

देशभर में चीनी की खुदरा कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. सरकार ने बताया कि देशभर में चीनी मिलों, डीलरों और कारोबारियों के स्टॉक की निगरानी और भौतिक जांच की जा रही है. तय सीमा से ज्यादा स्टॉक रखने, स्टॉक की जानकारी छिपाने और चीनी की बिक्री में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं.

सरकार ने थोक व्यापारियों के लिए चीनी के स्टॉक की लिमिट को 4000 क्विंटल से आधा घटाकर 2000 क्विंटल कर दिया है. 15 सितंबर से कोई भी चीनी डीलर स्टॉक मिलने की तारीख से 30 दिन से ज्यादा समय तक चीनी रोककर नहीं रख सकेगा. यह नया नियम 30 नवंबर 2026 तक पूरे देश में लागू रहेगा.

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के कड़े रुख के बीच लिया गया यह फैसला सीधे तौर पर बाजार में जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए है.

मंत्रालय के मुताबिक इन कदमों से रिटेल कीमतों में भी गिरावट का रुझान दिखने लगा है और आगे इनमें और कमी आने की उम्मीद जताई गई है.

कोलकाता और उससे लगे महानगरीय इलाकों के लिए स्टॉक लिमिट पहले की तरह 4,000 क्विंटल ही रहेगी. यहीं से पश्चिम बंगाल समेत पूरे पूर्वोत्तर भारत में सप्लाई होती है। सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए, इसलिए इन क्षेत्रों को राहत दी गई है.

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