पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश में बड़ी बहस चल रही है. सुरक्षा विशेषज्ञों ने सरकार को जल्दबाजी से बचने और फायदे-नुकसान का आकलन करने की सलाह दी है. मेजर जनरल (रिटायर्ड) फजले इलाही अकबर ने कहा कि मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने से बांग्लादेश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के मौके मिल सकते हैं.
विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उसे ‘मक्का रक्षा समझौते’ में शामिल होने में कोई जोखिम नहीं दिखता.
बांग्लादेश में पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने पर बहस तेज है. इस मुद्दे पर सोमवार 31 अगस्त 2026 को ढाका के कारवां बाजार में एक सम्मेलन आयोजित किया गया. इसका आयोजन ‘वॉयस फॉर रिफॉर्म’ ने किया था. इसमें बांग्लादेश के सुरक्षा विशेषज्ञ, राजनीतिक विश्लेषक, डिप्लोमेट्स और यूनिवर्सिटीज के प्रोफेसर्स शामिल हुए थे.
फाउंडेशन फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डेवलपमेंट स्टडीज (FSDS) के चेयरमैन और रिटायर्ड मेजर जनरल फजले इलाही अकबर ने कहा कि मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने से बांग्लादेश को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने का मौका मिल सकता है. लेकिन इस समझौते में शामिल होने से कई संभावित जोखिम भी हो सकते हैं.
देश के सुरक्षा विशेषज्ञों ने तारिक रहमान की सरकार को चेतावनी दी है कि जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाए. रिटायर्ड मेजर जनरल फजले इलाही अकबर ने कहा कि अगर बांग्लादेश इसका सदस्य बनता है तो भारत को अपनी सैन्य योजना बनाते समय बांग्लादेश को ज्यादा ध्यान में रखना पड़ सकता है.
वहीं, पूर्व राजनयिक साकिब अली ने कहा कि मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने से अकेले बांग्लादेश की सभी रक्षा और सुरक्षा चुनौतियां हल नहीं होंगी. इसलिए बांग्लादेश के लिए जरूरी है कि वह सभी पहलुओं को समझने के बाद ही आगे बढ़े. सरकार को भावनाओं या ज्यादा प्रचार के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए.
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