सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय ने भारत के खिलाफ फैसला सुनाया है. 5 जजों की बेंच ने सिंधु जल समझौते पर भारत के निलंबन के आदेश को गलत ठहराया है. हालांकि, भारत ने हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) द्वारा सिंधु जल संधि पर सुनाए गए फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है. कोर्ट में शामिल 5 में से 2 जजों का सीधा पाकिस्तान से कनेक्शन हैं. वहीं 2 जज अमेरिकी मूल के हैं.

नीदरलैंड के हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत ने सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत के फैसले को भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है.

हेग स्थित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ ने अपने फैसले में कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू रहेगी. हालांकि, भारत कोर्ट की सुनवाई में भी शामिल नहीं हुआ. इस पूरे मामले में पाकिस्तान की तरफ से मामले में पैरवी करने के लिए 20 से ज्यादा वकील कोर्ट में पेश हुए. कोर्ट ने भारत का पक्ष जानने के लिए अखबारों में छपी खबरों का सहारा लिया है.

फैसला सुनाने वाले 2 जज अमेरिका से हैं. वहीं 2 जजों का पाकिस्तान से सीधा कनेक्शन है. पाकिस्तान ने ही सिंधु जल विवाद को लेकर याचिका दाखिल की है. ऐसे में इस कोर्ट की निष्पक्षता का कोई औचित्य नहीं रह जाता है.

पाकिस्तान को वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने दो टूक जवाब देते हुए कहा है कि ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ का गठन सिंधु जल संधि का उल्लंघन करते हुए गैर-कानूनी तरीके से किया गया था.

सिंधु जल संधि को लेकर भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंक फैलाता है और इसके लिए नई दिल्ली ने इस संधि को निलंबित कर दिया है.

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