चंडीगढ़। पुडुचेरी के पांच हजार करोड़ रुपये के बहुचर्चित नकली दवा घोटाले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) की तफ्तीश में सामने आया है कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी को कानूनी राहत दिलवाने और जांच को प्रभावित करने के लिए हरियाणा कैडर के साल 2012 बैच के एक सीनियर आईपीएस (IPS) अधिकारी ने डील की थी. शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी को बचाने के बदले तीन करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी. सीबीआई ने इस अधिकारी की पहचान कर ली है, जो वर्तमान में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए (DGCA) में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर तैनात हैं. हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर उनके नाम को सार्वजनिक नहीं किया गया है.

दिल्ली में हुई थी तीन करोड़ रुपये की गुप्त मीटिंग

सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी साजिश इसी साल 14 मई को दिल्ली में रची गई थी, जहां आरोपियों और अधिकारियों के बीच एक गुप्त बैठक हुई थी. इस मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह और राजकुमार ने मुख्य आरोपी एन राजा से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी. तय सौदे के मुताबिक, इसमें से डेढ़ करोड़ रुपये एडवांस यानी काम शुरू होने से पहले ही दिए जाने थे.

हवाला के जरिए हुआ पैसों का लेनदेन, सीबीआई ने पकड़ा

इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह ने इस रिश्वत की रकम को ठिकाने लगाने के लिए हवाला नेटवर्क का सहारा लिया. हवाला एक ऐसा अवैध जरिया होता है जिसमें बिना किसी बैंक या कानूनी कागजात के, चोरी-छिपे मोटी रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाता है. इंस्पेक्टर ने हवाला ऑपरेटर के माध्यम से एक करोड़ रुपये लिए और उसे प्रभात नाम के एक व्यक्ति को सौंप दिया, जो संदिग्ध आईपीएस अधिकारी का बेहद करीबी परिचित बताया जा रहा है. इसके बाद इंस्पेक्टर ने बचे हुए 25 लाख रुपये अपने घर पर रख लिए. सीबीआई ने जब इस मामले में जाल बिछाकर छापेमारी की, तो इंस्पेक्टर और राजकुमार के पास से यह रकम बरामद हो गई.

क्या है पांच हजार करोड़ रुपये का यह नकली दवा घोटाला?

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2025 में हुई थी, जब पुडुचेरी में स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों ने दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों पर छापेमारी की थी. इस बड़ी कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में जानलेवा और मिलावटी दवाइयां और उन्हें बनाने का कच्चा माल जब्त किया गया था. बाजार में इन नकली दवाओं की कुल कीमत लगभग पांच हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी. इसके बाद मुख्य आरोपी एन राजा को गिरफ्तार किया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी, जिसने मार्च में नया केस दर्ज कर छानबीन शुरू की. अब सीबीआई डिजिटल साक्ष्यों यानी मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा की जांच कर रही है और संबंधित आईपीएस अधिकारी को पूछताछ के लिए समन भेजा गया है.