भोपाल, संजय पाटीदार। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भोपाल की बिगड़ती हवा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार और नगर निगम को सख्त निर्देश दिए हैं। NGT ने कहा है कि सर्दियों में राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स कई बार 300 के पार पहुंच जाता है, इसलिए ठंड शुरू होने से पहले 100 दिन का विंटर एक्शन प्लान तैयार किया जाए।
एनजीटी ने साफ कहा कि अगर अभी से तैयारी नहीं हुई तो आने वाली सर्दियों में हालात और बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक हवा में मौजूद पीएम 2.5 और धूल के महीन कण हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अस्थमा और सांस की बीमारियों का बड़ा कारण बन रहे हैं।मामले के याचिकाकर्ता राशिद नूर खान ने कहा कि विशेषज्ञों ने खुले में कचरा, पत्तियां, बायोमास और फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह रोक लगाने का सुझाव दिया है। अलाव को भी बड़ी वजह बताया गया। इसके बदले एलपीजी और इलेक्ट्रिक हीटर को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
एनजीटी ने खुले में कचरा और पत्तियां जलाने, अलाव, लकड़ी-कोयले के तंदूर और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर सख्त नियंत्रण के निर्देश दिए हैं। होटल, ढाबों और रेस्तरां में लकड़ी-कोयले के उपयोग को सीमित करने की भी सिफारिश की गई है।
इसके अलावा भारी वाहनों की शहर में एंट्री नियंत्रित करने, ट्रैफिक चौराहों पर फ्री लेफ्ट टर्न लागू करने और लो-इमिशन जोन बनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। एनजीटी ने ई-रिक्शा, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है।निर्माण कार्यो से उड़ने वाली धूल को लेकर भी एनजीटी सख्त दिखा। सभी निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट लगाना अनिवार्य करने, नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने और शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करने के निर्देश सुझाए गए हैं। नगर निगम को मशीनों से सड़क सफाई,पानी का छिड़काव और फुटपाथ-डिवाइडर की नियमित पानी छिडकाव करने को कहा है।
एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ योजना बनाना काफी नहीं होगा बल्कि रोजाना निगरानी के लिए मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाई जाएगी जो हर कार्रवाई की समीक्षा करेगी।

