कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। जबलपुर में 30 करोड़ से ज्यादा के धान घोटाले के खुलासे की तर्ज पर प्रदेशभर के कलेक्टरों को जांच करने के निर्देश दिए हैं। ईओडब्ल्यू से जांच रिपोर्ट तलब की है। तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर के कार्रवाई के बाद सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के एक्शन रिपोर्ट भी पेश करने के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला ?

जबलपुर में धान मिलिंग के नाम पर 30 करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा हुआ था। तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने खुलासा किया था। 16 करोड़ से ज्यादा धान फर्जी खरीदी की गई थी। धान परिवहन की गाड़ियों का 4 टोल नाकों से गुजरना बताया गया था। कटनी, नागपुर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना और मंडला जाते समय चारों टोल पड़ते है।

  • मोहरा टोल (कटनी मार्ग)
  • बहोरीपार टोल(नागपुर मार्ग)
  • सालीवाड़ा टोल नाका(मंडला मार्ग)
  • शहपुरा टोल (नरसिंहपुर, भोपाल, उज्जैन मार्ग)

टोल नाकों में डिलिवरी ऑर्डर की पर्ची दिखानी पड़ती है। 586 वाहनों में महज 15 वाहन ही टोल नाके से गुजरे थे। 576 वाहन ऐसे जो टोल नाके से गुजरे ही नहीं थे। 97.4 प्रतिशत ट्रिप का टोल नाकों से गुजरने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। धान परिवहन में एक दिन में एक ही गाड़ी द्वारा उज्जैन के चार चक्कर दिखा दिए गए थे। जांच में ट्रक की जगह 55 कारों के नंबर मिले थे। ट्रक की जगह पिकअप वैन के नंबर चढ़ा दिया गए थे। जांच में 44 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन फर्जी मिले थे। 121 वाहन ऐसे जिनकी लोडिंग क्षमता से 4 गुना ज्यादा लोड बताया गया है।

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