अजय सैनी, भिवानी: हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘शून्य मातृ मृत्यु पखवाड़ा’ (7 जुलाई से 22 जुलाई) के दौरान जारी एक प्रशासनिक आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार के इस निर्देश के तहत बीएएमएस (BAMS) चिकित्सकों और उनके द्वारा संचालित अस्पतालों में सामान्य प्रसव कराने पर रोक लगा दी गई है।

इस प्रतिबंधात्मक आदेश के विरोध में नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। नीमा की भिवानी जिला इकाई ने इस संबंध में प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को ज्ञापन सौंपकर तुरंत हस्तक्षेप करने और इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। चिकित्सकों का कहना है कि इस फैसले से पूरे प्रदेश के हजारों BAMS चिकित्सकों में गहरा असंतोष और चिंता व्याप्त है।

फैसले को बताया गैर-कानूनी और अव्यावहारिक

इस संवेदनशील मुद्दे पर नीमा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सरकार के इस फैसले को पूरी तरह गैर-कानूनी और अव्यावहारिक बताया है। नीमा के संरक्षक डॉ. आर.बी. गोयल ने कहा यह आदेश पूरी तरह से तर्कहीन है। सरकार एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ कानूनन मान्यता प्राप्त और प्रशिक्षित डॉक्टरों के हाथ बांध रही है। पूर्व में स्वयं हरियाणा सरकार ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष दायर अपने शपथपत्र में BAMS चिकित्सकों के इस प्रशिक्षण और योग्यता को स्वीकार किया था। अब बिना किसी वैधानिक संशोधन के केवल एक प्रशासनिक आदेश के जरिए हमारे अधिकारों को छीना जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ेगा बुरा असर

इस मौके पर नीमा के जिला अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा व महिला विंग की जिला अध्यक्ष डॉ. अनिता अंचल ने कहा कि BAMS चिकित्सकों को ‘भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद’ द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के तहत प्रसूति एवं स्त्री रोग का बाकायदा सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। सामान्य प्रसव कराना उनकी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।

उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षित प्रसव और मातृ-शिशु सुरक्षा उनकी भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि इस आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा, क्योंकि वहां आज भी बहुसंख्यक आबादी BAMS डॉक्टरों के भरोसे है। सरकार के इस प्रतिबंध से उन गरीब और ग्रामीण महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी होगी, जो बड़े अस्पतालों तक तुरंत नहीं पहुंच सकतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मातृ सुरक्षा के सरकारी अभियान का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन योग्य डॉक्टरों को उनके काम से वंचित करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।

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