Automobile Desk : मानसून की शुरुआत होते ही सड़कों की स्थिति बदल जाती है। गीली सड़कें, पानी के गड्ढे और जलभराव के बीच ड्राइविंग करना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे मौसम में वाहन पर नियंत्रण बनाए रखने और हादसों से बचने के लिए टायरों की ग्रिप और सही एयर प्रेशर सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। अक्सर कार चालक इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि बारिश के दिनों में टायरों में साधारण हवा भरवाना सही है या नाइट्रोजन गैस।

बारिश के मौसम में वातावरण के तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव आता है, जिससे टायरों के अंदर का प्रेशर प्रभावित होता है। जब सामान्य हवा का इस्तेमाल किया जाता है, तो वह तापमान के हिसाब से तेजी से फैलती और सिकुड़ती है। इसके कारण टायरों का प्रेशर लगातार बदलता रहता है, जो गीली सड़कों पर गाड़ी का संतुलन बिगाड़ सकता है। इसके विपरीत, नाइट्रोजन गैस पर बाहरी तापमान के बदलावों का असर बेहद कम होता है। टायरों में नाइट्रोजन रहने से हवा का दबाव काफी समय तक एक समान बना रहता है, जिससे तेज बारिश या गीली सड़कों पर भी कार पर चालक की पकड़ मजबूत रहती है।
इसके अलावा, टायरों की लाइफ और उनके रखरखाव के मामले में भी दोनों गैसों का व्यवहार अलग होता है। साधारण हवा में प्राकृतिक रूप से नमी (मॉइस्चर) मौजूद होती है, जो मानसून के दौरान और अधिक बढ़ जाती है। जब पंप से साधारण हवा भरी जाती है, तो यह नमी टायर के अंदर चली जाती है। अंदर जमा पानी या नमी धातु के रिम में जंग लगने की मुख्य वजह बनती है और धीरे-धीरे टायर के अंदरूनी रबर को भी नुकसान पहुंचाती है। दूसरी तरफ, नाइट्रोजन पूरी तरह से ड्राई यानी सूखी गैस होती है। इसमें नमी का नामोनिशान नहीं होता, जिससे रिम में जंग लगने का खतरा न के बराबर हो जाता है और टायर की शेल्फ लाइफ भी बढ़ती है।
उपलब्धता और लागत की बात करें तो साधारण हवा का विकल्प सबसे आसान और किफायती माना जाता है। यह हर छोटे-बड़े पेट्रोल पंप या स्थानीय पंक्चर की दुकान पर बेहद आसानी से और अक्सर मुफ्त में मिल जाती है। हालांकि, मानसून के मौसम में इसके साथ आने वाली नमी और बार-बार घटने-बढ़ने वाला प्रेशर इसकी बड़ी सीमा बन जाता है।
नाइट्रोजन भरवाने के लिए आपको किसी बड़े फ्यूल स्टेशन या टायर शोरूम पर जाना पड़ता है और इसके लिए शुल्क भी देना होता है, लेकिन सुरक्षा और टायरों की लंबी उम्र के लिहाज से इसे एक समझदारी भरा निवेश माना जाता है।
सड़क पर बेहतर ग्रिप, स्थिर प्रेशर, व्हील रिम की सुरक्षा और फिसलने वाले रास्तों पर गाड़ी के सटीक नियंत्रण के दृष्टिकोण से मानसून के दौरान नाइट्रोजन गैस का उपयोग अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से ज्यादा प्रभावी साबित होता है।


