दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) में कहा है कि अब तक की जांच में Indiabulls Housing Finance Limited (IHFL), जिसे अब सम्मान कैपिटल लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, की ओर से दिए गए कर्ज और कंपनी के पूर्व प्रमोटर समीर गेहलोत (Sameer Gehlaut) से जुड़ी संस्थाओं में किए गए निवेश के बीच कोई सीधा वित्तीय संबंध नहीं मिला है। EOW के मुताबिक, जांच के इस चरण तक उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर कर्ज दिए जाने और संबंधित संस्थाओं में निवेश के बीच प्रत्यक्ष वित्तीय कड़ी स्थापित नहीं हो सकी है।

2025 में दर्ज हुई थी FIR

इस मामले में 15 दिसंबर 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई थी। आरोप था कि कुछ कॉरपोरेट समूहों ने IHFL से लिए गए कर्ज की रकम का एक हिस्सा उन उद्देश्यों से अलग इस्तेमाल किया, जिनके लिए उन्हें ऋण मंजूर किया गया था। जांच के दौरान इस आरोप को भी शामिल किया गया कि कर्ज की रकम का इस्तेमाल समीर गेहलोत के लाभकारी स्वामित्व या नियंत्रण वाली संस्थाओं में निवेश करने के लिए किया गया। EOW ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि अब तक की जांच में कर्ज और गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं में निवेश के बीच कोई सीधा वित्तीय संबंध नहीं मिला है।

क्या बोला EOW

मामले की जांच के बारे में EOW ने बताया कि सम्मान कैपिटल, SEBI, MCA और नेशनल हाउसिंग बैंक से मिले लोन रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, फंड फ्लो, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई। DLF मामले में 67 लोन खातों में कुल 2,212.65 करोड़ रुपये मंजूर और वितरित किए गए थे। इन खातों से 2,731.58 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई और सभी लोन खाते अब बंद हो चुके हैं। EOW ने DLF समूह की कंपनियों से EMI/EMU में किए गए 66 करोड़ रुपये के निवेश की भी जांच की। यह निवेश 2014-15 में किया गया था, जबकि संबंधित IHFL लोन करीब 17 महीने बाद लिया गया। जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड में लोन की रकम को समीर गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं तक पहुंचने का कोई वित्तीय ट्रेल नहीं मिला।

वाटिका और अमेरीकॉर्प समूह के मामलों में भी नहीं मिली वित्तीय कड़ी

वाटिका समूह के मामले में 113 लोन खातों में कुल 2,832.21 करोड़ रुपये मंजूर और वितरित किए गए थे। EOW के मुताबिक, इन खातों से 4,291.36 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई और सभी खाते बंद हो चुके हैं। जांच एजेंसी ने अग्नेस डेवलपर्स की ओर से समीर गेहलोत से जुड़ी कंपनियों में किए गए 200 करोड़ रुपये के निवेश की भी जांच की। यह निवेश 2014 में हुआ था, जबकि संबंधित IHFL लोन 2016 में लिया गया। यानी दोनों घटनाओं के बीच दो साल से अधिक का अंतर था। उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर EOW को लोन की रकम और निवेश के बीच कोई वित्तीय कड़ी नहीं मिली। वहीं, अमेरीकॉर्प समूह से जुड़े चार लोन खातों में 154.50 करोड़ रुपये मंजूर और वितरित किए गए थे। इन खातों से 166.28 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई और सभी खाते बंद हो चुके हैं।

रिपोर्ट में ND कपूर एंड कंपनी की ओर से जारी चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रमाणपत्र का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, पांचों कॉरपोरेट समूहों से जुड़े कुल 197 लोन खातों में 8,267.86 करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर किए गए थे। इन खातों से 11,073.77 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई और सभी 197 खाते बंद हो चुके हैं। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला DLF, कॉर्डिया और वाटिका समूहों से जुड़े आरोपों की जांच से संबंधित है। मामले में IHFL से लिए गए कर्ज और समीर गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं में किए गए निवेश के बीच संभावित वित्तीय संबंधों की जांच की जा रही है। EOW ने यह स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में दाखिल की है। रिपोर्ट अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रवि कुमार सिंह की ओर से पेश की गई। EOW की रिपोर्ट में अब तक की जांच के आधार पर कहा गया है कि विभिन्न लोन खातों, बैंक रिकॉर्ड, फंड फ्लो और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई है। एजेंसी को उपलब्ध रिकॉर्ड में कर्ज की रकम और गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं के निवेश के बीच कोई सीधा वित्तीय ट्रेल नहीं मिला है।

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