पश्चिम बंगाल में सुवेंदु सरकार पूरे एक्शन मोड में दिखाई दे रही है. पिछली सरकार में आये दिन उपद्रवियों द्वारा तोड़फोड़ और सार्वजानिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की प्रवित्ति पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है.इसी के तहत मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार ने नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानून लागू करने का ऐलान किया है. जिसके तहत अब राज्य सरकार सार्वजनिक सपत्ति के तोड़-फोड़ से हुए नुकसान की भरपाई उस नुकसान की कीमत से 3 गुना ज़्यादा रकम वसूल करके करेगी.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा ?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अब सार्वजानिक संपत्तियों को निशाना बनाने पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा. उन्होंने कहा दंगे, हिंसक प्रदर्शन या तोड़फोड़ में क्षतिग्रस्त संपत्ति की कीमत 3 गुना वसूली जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए ये भी कहा कि अगर कोई भुगतान नहीं करता तो उसकी संपत्ति की नीलामी भी की जाएगी.
सीएम अधिकारी ने कहा- विरोध का अधिकार लेकिन हिंसा का नहीं
शनिवार (4 जुलाई) की शाम भवानीपुर में नागरिक समाज और व्यापारिक समुदाय के साथ बैठक में सीएम अधिकारी ने कहा कि हर किसी को विरोध का अधिकार है, लेकिन यह विरोध हिंसा में नहीं बदलना चाहिए और न ही इंडस्ट्रियल यूनिट को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई जबरदस्ती इंडस्ट्रियल यूनिट बंद करवाता है और उसमें तोड़फोड़ करता है तो उसे जेल भी होगी और उसे नुकसान की 3 गुना राशि जुर्माने के रूप में देनी होगी.
विधानसभा में पास हुए दो नए कानून
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने 28 जून को कानून-व्यवस्था से जुड़े दो अहम बिल पास किए हैं.जिनका मकसद संगठित अपराध और सार्वजनिक अव्यवस्था से निपटने के लिए राज्य की शक्तियों को और मजबूत करना है.
पहला है वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (अमेंडमेंट) एक्ट. जो दंगों, गैर-कानूनी भीड़ और हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराता है. वहीं दूसरा है वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल. इसमें बिना ट्रायल 12 महीने तक एहतियातन हिरासत में रखने का प्रावधान है. सरकार ने कहा है कि ‘वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (अमेंडमेंट) एक्ट’ का मकसद इंडस्ट्रियल और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करना और संपत्ति के नुकसान के लिए जवाबदेही तय करके निवेशकों का भरोसा बढ़ाना है.
सरकार का कहना है कि नया कानून औद्योगिक और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा के लिए लाया गया है. तोड़फोड़ की घटनाओं से निवेशकों का भरोसा कम होता है. अब जवाबदेही तय होने से औद्योगिक इकाइयों को सुरक्षा मिलेगी और राज्य में निवेश का माहौल बेहतर होगा.
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