पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। 94 गांव के 223 आंगनबाड़ी केंद्र में 9584 हितग्राहियों के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले महिला बाल विकास विभाग के पास साल भर से परियोजना अधिकारी नहीं। 9 नए पदों की भर्ती भी साल भर से अटकी।जनपद अध्यक्ष का आरोप है कि योजना का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि औपचारिकता निभाई जा रही।
जिले के अंतिम छोर में ओडिसा सीमा पर बसे देवभोग ब्लॉक में महिला बाल विकास विभाग के योजनाओं के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग पर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वजह यहां साल भर से परियोजना अधिकारी का पद का रिक्त होना है। पिछले 6 माह से जिस जिला परियोजना अधिकारी समीर सौरभ को देवभोग ब्लॉक परियोजना का प्रभारी बनाया गया है, उन्हें रायपुर संचालनालय में सहायक संचालक बना दिया गया है, अब एक अधिकारी के पास संचालनालय के अहम पद के अलावा जिला और ब्लॉक के परियोजना का जिम्मा है।

अतिरिक्त जिम्मेदारी को 225 किमी दूर राजधानी से निर्वहन कैसे किया जा सकता है, इसका सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं।रही बात ब्लॉक के योजनाओं के क्रियान्वयन की तो उसके लिए सुपरवाइजर सुंदर ठाकुर को परियोजना का प्रशासनिक प्रभार दे दिया गया है। पहले से जिस परियोजना में सुपरवाइजर का 4 पद रिक्त पड़ा हो, उनमें से एक को प्रशासनिक कार्य थोपा गया तो योजनाओं के क्रियान्वयन प्रभावती होना भी तय है।
रिक्त पदों की नियक्ति हुई प्रभावित, जब-जब हुई अनियमितता पाई गई। देवभोग ब्लॉक में 223 आंगनवाड़ी केंद्र हैं, यहां 15 से ज्यादा केन्द्रों में सहायिका के अलावा कार्यकर्ता की नई नियुक्ति की जानी है। 9 रिक्त पदों की प्रक्रिया साल भर से लंबित पड़ा है, क्योंकि जिम्मेदार अफसरों की गैरमौजदगी में नियुक्ति 7 पदों में 3 के दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी मिली।

दो-दो अभ्यर्थियों को जेल की सलाखों के पीछे तक जाना पड़ गया। अब जिम्मेदार अफसर के गैर मौजूदगी में मातहत भी फाइल आगे बढ़ाने में डर रहे है। ऐसे में जिन केंद्रों में पद रिक्त है, वहां योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।
योजनाओं का क्रियान्वयन बना खाना पूर्ति
दौरे कर लौटी जनपद अध्यक्ष पद्मलया निधि ने बताया कि सहायिका के आभार में केंद्रों में विभाग की कई महत्पूर्ण योजनाएं प्रभावित हो रही है। बच्चों को गर्म भोजन खिलाना हो या फिर गर्भवती को पोषण आहार देने के अलावा ग्रामीणों बच्चों के खेल और पढ़ाई दोनों प्रभावित है। निधि ने कहा कि ऐसा चलता रहा तो ग्रामीण बच्चे महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी इस महत्त्वपूर्ण विभाग के योजनाओं से ग्रामीण वंचित हो जाएंगे।
महिलाओं में भेदभाव दूर नहीं कर पाई विभाग
देवभोग ब्लॉक के 90 से ज्यादा केंद्रों में एस सी कैटेगिरी की महिला आंगनबाड़ी और सहायिका है। जहां गर्म भोजन या तो मजदूरी में रखे अतरिक्त कर्मी बनाते है या सूखा राशन बांट दिया जाता है। क्योंकि आज भी ब्लॉक में छुआ छूत की भावना ग्रामीण क्षेत्र अन्य समुदाय के लोगों में घर कर गई है।
समाधान शिविर के समीक्षा के दौरान यह मसला सीएम विष्णुदेव साय के समक्ष भी उठा था। साय ने अफसरों को जागरूकता अभियान चल कर इस भेदभाव के गंभीर खाई को खत्म करने निर्देश दिया था। पर अफसरों के अभाव में यहां यह महत्वपूर्ण अभियान भी नहीं चलाया जा पा रहा है।
अफसरों को प्रभार देना संभव नहीं
मैनपुर के 358 केंद्र भी प्रभारी भरोसे देवभोग ब्लॉक के ढर्रे में चल रहा है। विभाग के अफसरों को मॉनिटरिंग की खास ट्रेनिंग के साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन्य को पूरी तरह डिजिटाइजेशन किया गया है, ऐसे में दूसरे विभाग के अफसरों को भी इस विभाग के काम काज की जानकारी का अनुभव नहीं होता। ऐसे में ग्रेड को दरकिनार कर सुपरवाइजर जैसे फील्ड के पद धारी को प्रशासनिक का जिम्मा थोप, क्रियान्वयन की खानापूर्ति किया जा रहा है।
रिक्त पदों पर मांगी गई है नियुक्ति
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग अशोक पांडेय ने बताया कि जिले में 5 में से दो परियोजना में पद रिक्त है। प्रभारी के जरिये योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन कराने की कोशिश हो रही है। कलेक्टर के माध्यम से रिक्त पदों पर नियुक्ति मांगी गई है। पदों की भरपाई होते ही आंगनबाड़ी केंद्रों में नियुक्ति की प्रकिया हो या अन्य कार्यों को सुचारु रूप से कराया जाएगा।
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