सतीश सिंह, लखनऊ. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ में कॉर्पोरेट रिलेशंस कमेटी (सीआरसी) द्वारा वार्षिक लीडरशिप कॉन्क्लेव ‘बोधिसूत्र 2026’ का आयोजन किया गया. इस वर्ष का विषय “अगले दशक के लिए भारत की विकास गाथा का निर्माण” रहा, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञों, कॉर्पोरेट नेताओं और नीति निर्माताओं ने छात्रों के साथ अपने अनुभव और विचार साझा किए.
कॉन्क्लेव में बेसेमर वेंचर पार्टनर्स के पार्टनर अनंत विदुर पुरी ने वेंचर कैपिटल और ग्रोथ-स्टेज निवेश पर चर्चा की. फॉर्च्यून 500 की अध्यक्ष एवं प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस अनु रत्निंदे ने उद्योग और अकादमिक जगत के संगम पर नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला. वहीं एक्सेंचर स्ट्रैटेजी की अर्चना ए. प्रसाद ने समावेशी नेतृत्व और मानव संसाधन रणनीति पर अपने विचार रखे.
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सीआईआई (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भारत की आर्थिक दिशा और औद्योगिक नीतियों पर विस्तार से चर्चा की. किंकिनी रायचौधरी ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और भविष्य की एंटरप्राइज रणनीतियों पर विचार साझा किए. जेपी मॉर्गन चेस की कार्यकारी निदेशक मीता शर्मा ने वैश्विक बैंकिंग के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला, जबकि नोमुरा कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस के वरिष्ठ साझेदार सनी गोयल ने निवेश रणनीति और उभरते अवसरों पर छात्रों का मार्गदर्शन किया.
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि हर सत्र पारंपरिक व्याख्यान तक सीमित न रहकर संवादात्मक शैली में आयोजित किया गया. छात्रों ने वक्ताओं से सीधे प्रश्न पूछे और उद्योग जगत की चुनौतियों, अवसरों तथा नेतृत्व से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर खुलकर चर्चा की. इस अवसर पर कॉर्पोरेट रिलेशंस कमेटी के चेयरपर्सन प्रो. प्रेम प्रकाश दिवानी ने कहा कि सीआरसी का उद्देश्य कक्षा में मिलने वाले ज्ञान और उद्योग जगत की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच मजबूत सेतु बनाना है. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों को समकालीन व्यावसायिक परिदृश्य की बेहतर समझ देते हैं और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं. ‘बोधिसूत्र 2026’ ने छात्रों को देश और दुनिया के अग्रणी कॉर्पोरेट नेताओं से सीधे संवाद का अवसर प्रदान किया और नेतृत्व, नवाचार, निवेश, नीति निर्माण और डिजिटल परिवर्तन जैसे विषयों पर नई सोच विकसित करने का मंच उपलब्ध कराया.


