कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के जींद–सोनीपत रेल रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल सफल रहा है, जिसने भारत को स्वच्छ और हरित रेलवे तकनीक के मामले में एक नई पहचान दिलाई है। Indian Railways के इस प्रोजेक्ट को भविष्य की ट्रांसपोर्ट क्रांति माना जा रहा है, क्योंकि यह ट्रेन न धुआं छोड़ती है और न ही किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन करती है।
पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल
जींद जंक्शन से सोनीपत तक हुए इस ट्रायल में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें ट्रेन से केवल पानी और भाप निकलती है। यही वजह है कि इसे पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल माना जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ भारत अब Germany, China और United Kingdom जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां पहले से हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं।
ट्रेन की गैस खपत करीब 800 ग्राम प्रति किलोमीटर
ट्रायल के दौरान Commission of Railway Safety (सीआरएस) की टीम ने जींद में बने हाइड्रोजन प्लांट और ट्रेन की सुरक्षा जांच भी की। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन की गैस खपत करीब 800 ग्राम प्रति किलोमीटर दर्ज की गई, जो पारंपरिक डीजल इंजन के मुकाबले ज्यादा कुशल मानी जा रही है।
10 कोच के साथ चलेगी ट्रेन
इस ट्रेन को 10 कोच के साथ चलाने की योजना है, जिससे यह न सिर्फ पर्यावरण को सुरक्षित रखेगी बल्कि भविष्य में रेलवे के ऑपरेशन कॉस्ट को भी कम कर सकती है। यह प्रोजेक्ट “मेक इन इंडिया” (भारत में निर्मित) की दिशा में भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इसमें देश के इंजीनियरों की अहम भूमिका रही है।

