हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर में चोरी की वारदातें अब इतनी बेखौफ हो गई हैं कि आस्था के केंद्र भी निशाने पर आ गए हैं। एरोड्रम थाना क्षेत्र स्थित एक जैन मंदिर में नकाबपोश बदमाशों ने देर रात ऐसी वारदात को अंजाम दिया, जिसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। रविवार देर रात मंदिर परिसर में घुसे बदमाशों ने पूरे 42 मिनट तक अंदर जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान उन्होंने आराम से मंदिर की तलाशी ली और कीमती सामान समेटकर फरार हो गए। हैरानी की बात यह है कि इतनी लंबी वारदात के दौरान किसी को भनक तक नहीं लगी।
चोरी गए सामान की सूची चौंकाने वाली
9 अष्टधातु की मूर्तियां, 28 कलश और करीब 15 लाख रुपए का माल बदमाश अपने साथ ले गए। यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था पर सीधा हमला माना जा रहा है।पूरी वारदात मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि नकाबपोश बदमाश बेहद सुनियोजित तरीके से अंदर घुसते हैं, बिना किसी जल्दबाजी के हर कोने को खंगालते हैं और फिर सामान लेकर निकल जाते हैं। उनके हावभाव से साफ है कि उन्हें पता था कि क्या और कहां रखा है—यानि यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ किया गया अपराध है।
अब सवाल पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हो रहे
जब मंदिर में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, तो फिर सुरक्षा के अन्य इंतजाम क्यों नहीं थे? 42 मिनट तक बदमाश अंदर रहे, फिर भी कोई अलर्ट सिस्टम क्यों सक्रिय नहीं हुआ? क्या इलाके में पुलिस गश्त सिर्फ कागजों तक सीमित है?पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है और जल्द ही उन्हें पकड़ लिया जाएगा। लेकिन हर बार की तरह यही सवाल फिर सामने है—क्या आरोपी घटना के बाद ही पकड़ में आएंगे, या फिर पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी? इंदौर, जिसे देश का सबसे व्यवस्थित शहर बताया जाता है, वहां इस तरह मंदिरों में चोरी होना सीधे-सीधे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। अगर धार्मिक स्थल भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

