NSUI Protest outside DD News Office: नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित डीडी न्यूज दफ्तर के बाहर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल किया। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी के खिलाफ एंकर द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से नाराज एनएसयूआई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एंकर का पुतला फूंका और परिसर के पास तोड़फोड़ की। दिल्ली पुलिस ने हिंसा पर कार्रवाई करते हुए तीन एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का गिरफ्तार किया है। फिलहाल पूरे विवाद पर प्रसार भारती के तहत आने वाले डीडी न्यूज़ ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक सफाई पेश नहीं की है।

पुलिस फिलहाल अन्य संदिग्धों की पहचान और तलाश में जुटी है। एनएसयूआई ने इन गिरफ्तारियों को लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश बताया है, जबकि पुलिस ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आधार पर कार्रवाई की है।

दरअसल पूर विवाद डीडी न्यूज़ पर हुई एक हालिया डिबेट से शुरू हुआ। आरोप है कि एंकर अशोक श्रीवास्तव ने चर्चा के दौरान राहुल गांधी की तुलना ‘सावरकर की चप्पल की धूल’ से की थी। एनएसयूआई ने इस बयान को एक संवैधानिक पद पर बैठे शख्स का अपमान और सार्वजनिक प्रसारक की गरिमा के खिलाफ बताया है।राहुल गांधी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर एनएसयूआई कार्यकर्ता डी हाउस स्थित डीडी न्यूज़ दफ्तर के बाहर जमा हो गए। प्रोटेस्ट के दौरान गुस्साए कार्यकर्ताओं ने एंकर का पुतला फूंका। हालांकि तब और तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हिंसा के संबंध में तीन एनएसयूआई कार्यकर्ताओं राहुल काजला, अखिलेश यादव और सत्यम कुशवाहा को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया है।

कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को एनएसयूआई ने राजनीति से प्रेरित बताया

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने एंकर की टिप्पणी और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी दोनों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल राजनीतिक प्रोपेगेंडा के लिए किया जा रहा है। संगठन ने प्रशासन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं- गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई, एंकर द्वारा सार्वजनिक माफी और सरकारी मीडिया संस्थानों की जवाबदेही तय करना।

संपादकीय स्वतंत्रता पर छिड़ी नई बहस

वहीं इस घटना ने सरकारी प्रसारकों की निष्पक्षता और संपादकीय स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे राजनीतिक पक्षपात का उदाहरण बता रहे हैं। वहीं आलोचकों का तर्क है कि विरोध के नाम पर तोड़फोड़ करना किसी भी आंदोलन की वैधता को खत्म करता है। फिलहाल, मंडी हाउस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

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