भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य में ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याणकारी कार्यों में तेजी लाने के लिए राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड (State Transgender Welfare Board) का पुनर्गठन किया है। गौर करने वाली बात यह है कि सरकार ने पिछली अधिसूचना जारी करने के मात्र दो दिन बाद ही यह नया बदलाव किया है।

सामाजिक सुरक्षा और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (SSEPD) द्वारा 23 अप्रैल 2026 को जारी इस नई अधिसूचना के अनुसार, बोर्ड के नेतृत्व ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। पुनर्गठित बोर्ड में अब प्रशासनिक प्रमुख के बजाय राजनीतिक नेतृत्व को प्राथमिकता दी गई है।

पूर्व में मुख्य सचिव को अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन अब SSEPD विभाग के मंत्री इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। SSEPD विभाग के प्रधान सचिव बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे।SSEPD विभाग के निदेशक को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।

बोर्ड को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

पुनर्गठन का उद्देश्य और महत्व

अधिकारियों के अनुसार, बोर्ड के नेतृत्व में इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रशासनिक और राजनीतिक शक्ति प्रदान करना है। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और 2020 के नियमों के अनुरूप यह बोर्ड निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा:

अधिकारों का संरक्षण: समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना और उनकी गरिमा सुनिश्चित करना।

पुनर्वास और आजीविका: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए विशेष पुनर्वास कार्यक्रम चलाना और कौशल विकास के अवसर पैदा करना।

स्वास्थ्य और शिक्षा: समुदाय के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और आवास योजनाओं की निगरानी करना।

नीतिगत समन्वय: विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल बिठाना ताकि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

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