लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. राजभर ने कन्नौज में PDA सम्मेलन के दौरान कम भीड़ जुटने और जिला इकाई भंग किए जाने को लेकर तंज कसा.

उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जिस कन्नौज को अखिलेश यादव खानदानी विरासत मानते थे, वहीं खाली कुर्सियों ने उनकी हैसियत बता दी. राजभर ने कहा कि सपा प्रमुख को चुनाव से पहले पूरे प्रदेश की कार्यकारिणी भंग कर देनी चाहिए.

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‘जिला पदाधिकारियों की क्या गलती थी?’

राजभर ने पोस्ट में लिखा कि कन्नौज की जिला इकाई भंग करने से पहले अखिलेश यादव को अपनी भूमिका पर भी विचार करना चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब पार्टी प्रमुख एसी, पीसी और ट्विटर की दुनिया से बाहर नहीं निकलेंगे, तो जिला स्तर के नेता क्या करेंगे. राजभर के मुताबिक, कन्नौज में भीड़ नहीं जुटने के लिए केवल जिला पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है. उन्होंने इसे सपा की कमजोर होती पकड़ से जोड़ने की कोशिश की.

PDA सम्मेलन में भीड़ कम होने का दावा

कन्नौज अखिलेश यादव का लोकसभा क्षेत्र है. 16 अक्टूबर को सपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की मौजूदगी में PDA सम्मेलन आयोजित किया गया था. इसके बाद रविवार को अखिलेश यादव ने कन्नौज की जिला कार्यकारिणी भंग कर दी. जिलाध्यक्ष कलीम खान समेत सभी पदाधिकारियों को हटाए जाने की बात सामने आई. राजभर ने सम्मेलन में कम भीड़ होने को लेकर सपा नेतृत्व पर सवाल उठाए.

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‘2027 में सपा साफ’, राजभर का दावा

राजभर ने अपने बयान में सपा के पुराने नेतृत्व का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव ने मेहनत से कन्नौज में पार्टी का आधार बनाया था. अखिलेश यादव उस विरासत को संभाल नहीं पाए. राजभर ने दावा किया कि गैर-यादव पिछड़े और बहुजन समाज ने सपा को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा को हार का सामना करना पड़ेगा.