लखनऊ में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आशीर्वाद का दीया जलाने को लेकर कांग्रेस, सपा और वामपंथियों पर निशाना साधा. राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि इस आयोजन को लेकर एक-दो दिन में विरोध और हल्ला शुरू होगा.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान के तहत आशीर्वाद का दीया जलाने को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथियों पर निशाना साधा है. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राजभर ने कहा कि इस आयोजन को लेकर एक-दो दिन में हो-हल्ला शुरू होने वाला है.
राजभर ने लिखा कि हल्ला होगा कि तेल जल गया, त्राहि-त्राहि हो गई. उन्होंने दावा किया कि इसके लिए टूलकिट भी तैयार है और अब केवल हल्ले का इंतजार किया जा रहा है.
दीया जलाने पर बयान
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पूरे देश ने घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया. उनके मुताबिक अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों ने सेवा संकल्प अभियान से खुशी-खुशी जुड़कर जनता से आशीर्वाद मांगा और हर्षोल्लास के साथ आशीर्वाद का दीया जलाया.
राजभर ने सवाल उठाया कि इससे किसे परेशानी हुई. उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सपा और वामपंथी सवर्ण अब यह कहकर हल्ला करेंगे कि इतना तेल और बाती जल गई और दीया बर्बाद हो गया. उन्होंने कांग्रेस के टूलकिट, वामपंथियों और सपाइयों के विरोध का दावा किया.
वामपंथ पर सवाल
राजभर ने कहा कि वामपंथी सवर्णों को छोड़ दिया जाए तो पूरा सवर्ण समाज उनके साथ है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक खास जमात वर्षों से समाज में अपना वैचारिक प्रभाव बनाने का प्रयास कर रही है.
उन्होंने अति पिछड़े, दलित और बहुजन समाज के लोगों से वामपंथी नेताओं की जातीय पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाने को कहा. राजभर ने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि वामपंथी विचार की ऊंची कुर्सियों पर कौन बैठा था, कौन बैठा है और कौन बैठेगा. उन्होंने दावा किया कि सभी वामपंथी अगड़े मिलेंगे.
राजभर ने कहा कि ब्राह्मणवाद के नाम पर किसे गाली दिलाई जाती है और विचार की दुकान किसके हाथ में है, यह इससे स्पष्ट हो जाएगा.
गरीब परिवारों का मुद्दा
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ऐसे लोग वास्तव में राजा और राज परिवारों के आसपास रहने वाले हैं. उनके मुताबिक गरीब और सामान्य परिवार से निकलकर कोई व्यक्ति अपने दम पर आगे बढ़े, यह उन्हें पसंद नहीं आता.
राजभर ने इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा खुद, निषाद और दलित तथा अति पिछड़े समाज से निकलने वाले लोगों का भी उल्लेख किया.
मार्क्स-लेनिन से अंबेडकर तक
राजभर ने वामपंथी और समाजवादी राजनीति पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जो लोग कल तक मार्क्स और लेनिन को मानते थे, वे अचानक अंबेडकरवादी बन गए. उन्होंने कहा कि लोहिया और जेपी के नाम पर पार्टी चलाने वाले भी अचानक नारे बदलकर जय भीम कहने लगे.
राजभर ने कहा कि विचार, नारे और महापुरुष इतनी जल्दी बदल जाएं तो यह सोचने वाली बात है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक खास जमात ने वर्षों तक अति पिछड़ों और दलितों को अपने विचारों के जाल में फंसाने की कोशिश की.
उनके मुताबिक परेशानी तब होती है, जब अति पिछड़ा, दलित और बहुजन समाज किसी और के बताए रास्ते पर चलने के बजाय अपना रास्ता खुद चुनने लगता है. राजभर ने कहा कि घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी इसी वजह से परेशानी है.
कांग्रेस पर भी निशाना
राजभर ने दावा किया कि भारतीय वामपंथ कांग्रेस की प्रयोगशाला है, जहां देश और समाज को बांटकर कुछ परिवारों की गुलामी करने की ट्रेनिंग मिलती है. उन्होंने कहा कि सभी वामपंथी अंत में वहीं नौकरी करते हैं.
पोस्ट के अंत में राजभर ने कहा कि पिछड़ा और दलित समाज अब जाग गया है. उन्होंने दावा किया कि उनके मुताबिक सामने वाले के चेहरे से नकाब उतर चुका है और पिछड़ों-दलितों को जितना बांटने की कोशिश होगी, वे उतना ही जुड़ते जाएंगे.
राजभर ने अपने पोस्ट में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा, “बस देखते जाइए.”



