वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। जिले के कोटा विकासखंड स्थित ग्राम अमाली में प्रस्तावित कोल वॉशरी परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। 19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों ने प्रशासन से इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र की कृषि, पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेगा।
ग्रामीणों के अनुसार मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित कोल वॉशरी कृषि भूमि पर स्थापित की जा रही है, जो भूमि उपयोग परिवर्तन के नियमों के विपरीत है। उनका आरोप है कि परियोजना के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और ग्रामसभा की सहमति को भी नजरअंदाज किया गया है।
ग्रामीणों ने दावा किया कि अनुसूचित क्षेत्रों में लागू पेसा एक्ट के तहत ग्रामसभा को प्राप्त अधिकारों की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि ग्रामसभा की सहमति के बिना परियोजना को आगे बढ़ाना कानून के विरुद्ध है।

पहले भी स्थगित हो चुकी है जनसुनवाई
यह पहली बार नहीं है जब इस परियोजना का विरोध हो रहा है। इससे पहले दिसंबर 2025 में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी। अब दोबारा जनसुनवाई की घोषणा के बाद ग्रामीण फिर विरोध के लिए लामबंद हो गए हैं।
प्रदूषण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि कोल वॉशरी शुरू होने से वायु और जल प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे आसपास के गांवों की खेती और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही उन्होंने अचानकमार टाइगर रिजर्व पर संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग स्थापित होने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने 19 जून की जनसुनवाई स्थगित नहीं की तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगे।
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