यूथ कांग्रेस के बाद अब कांग्रेस की छात्र इकाई National Students’ Union of India (एनएसयूआई) ने राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक चुनाव कराने की घोषणा की है। संगठन ने कहा है कि चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संपन्न होगी। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ (Vinod Jakhar) और केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के समन्वयक के.के. शास्त्री  (K. K. Shastri) ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व ने 30 अप्रैल को केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया था। यह प्राधिकरण देशभर में एनएसयूआई के संगठनात्मक चुनावों के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगा।

चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत देशभर के विश्वविद्यालयों में चुनाव के माध्यम से यूनिट गठन से होगी। संगठन के अनुसार, यूनिवर्सिटी स्तर पर इकाइयों के गठन के बाद जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और अन्य संगठनात्मक पदों के लिए चुनाव कराए जाएंगे। प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग चुनाव कार्यक्रम जारी किए जाएंगे, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया का संचालन किया जा सके।

मोबाइल ऐप से होंगे NSUI चुनाव

NSUI ने संगठनात्मक चुनावों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संगठन के अनुसार, पूरी चुनाव प्रक्रिया मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से संचालित की जाएगी, जिससे मतदान और चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया जा सके। एनएसयूआई ने बताया कि चुनाव लड़ने के लिए 16 से 27 वर्ष आयु वर्ग के छात्र पात्र होंगे। वहीं, संगठन की तीन वर्ष की सदस्यता (मेंबरशिप) शुल्क 45 रुपये निर्धारित किया गया है।

पहला बड़ा संगठनात्मक अभियान, कई राज्यों में मिलेगा नया नेतृत्व

NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के कार्यभार संभालने के बाद यह संगठन का पहला बड़ा संगठनात्मक अभियान माना जा रहा है। इस चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से देश के कई राज्यों में नए पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा। राजस्थान सहित कई राज्यों में जिला और प्रदेश स्तर पर संगठन को नया नेतृत्व मिलेगा। खासतौर पर राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है, जिसे संगठनात्मक चुनाव के बाद भरे जाने की संभावना है।

NSUI ने संगठनात्मक चुनावों की घोषणा के साथ केंद्र और विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी सवाल उठाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन ने आरोप लगाया कि देशभर के अधिकांश विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं।  छात्र राजनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है और छात्रों को नेतृत्व विकसित करने का अवसर देने के लिए विश्वविद्यालयों में नियमित रूप से छात्रसंघ चुनाव कराना आवश्यक है।

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