अनुराग शर्मा, सीहोर। जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। पिछले लंबे समय से वेतन और पीएफ (PF) की समस्याओं से जूझ रहे लगभग सभी विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों ने लामबंद होकर मंगलवार को कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो वे काम बंद कर हड़ताल पर चले जाएंगे।
तीन महीने से वेतन का इंतजार, पीएफ भी गायब
ज्ञापन देने पहुंचे कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। घर चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की स्कूल फीस से लेकर राशन तक के लाले पड़ रहे हैं। इसके अलावा, पिछले 6 महीनों से उनका पीएफ (प्रोविडेंट फंड) भी उनके खातों में जमा नहीं किया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
ठेकेदार की ‘बदतमीजी’ और कंपनी की लापरवाही
अस्पताल में आउटसोर्सिंग का ठेका सिग्मा इन्फोटेक्स कंपनी के पास है। कर्मचारियों ने कंपनी और उसके ठेकेदार पर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि-जब भी वेतन के संबंध में ठेकेदार से बात करने की कोशिश की जाती है, तो वह अभद्र व्यवहार (बदतमीजी) करता है। ठेकेदार फोन तक नहीं उठाता, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। कंपनी प्रबंधन जमीनी हकीकत से आंखें मूंदे बैठा है। ”हम दिन-रात अस्पताल की व्यवस्थाएं संभालते हैं, लेकिन जब हक की बात आती है तो हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है। बिना वेतन के हम कब तक काम करेंगे?”
हड़ताल की चेतावनी: चरमरा सकती है स्वास्थ्य व्यवस्था
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे कर्मचारियों ने दो टूक कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनका बकाया वेतन और पीएफ का भुगतान नहीं किया गया, तो वे पूर्णतः काम बंद कर स्ट्राइक पर चले जाएंगे। जिला अस्पताल में सफाई, सुरक्षा और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। यदि ये हड़ताल पर जाते हैं, तो जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं, जिसका सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
कर्मचारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सिग्मा इन्फोटेक्स कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में वेतन समय पर मिले। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है या फिर मरीजों को हड़ताल की मार झेलनी पड़ेगी।

