राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। ब्रिटेन में मौजूद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान दिए गए अपने बयान पर मचे सियासी और सामाजिक बवाल पर अपनी सफाई दी है। प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उनके बयान का अनर्थ निकाला गया है और वह किसी के भोजन या जीने की स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगा रहे हैं, बल्कि एक धार्मिक गुरु होने के नाते अहिंसा का संदेश दे रहे हैं।
हाल ही में पश्चिम बंगाल के लिलुआ में आयोजित कथा के बाद उठे विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हमारे वहां से निकलते ही बहुत तेज चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हमारी आदत कभी किसी के खान-पान या पहनावे पर बोलने की नहीं रही। दुर्गा पूजा की बात थी तो हमने सीधी सी बात कही कि देवी के आसपास पवित्रता बनाए रखें और पंडाल के नीचे मांस का भक्षण न करें।’
जिन्हें खाना है, वे अपने घर जाकर खाएं। हम किसी के भोजन पर रोक लगाने वाले कौन होते हैं?”
धार्मिक गुरु के दायित्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जीव हिंसा और बलि प्रथा के खिलाफ बोलना उनका शास्त्र सम्मत कर्तव्य है। उन्होंने कहा, धार्मिक गुरु होने के नाते वह अहिंसा का मार्ग बता सकते हैं। हर जीव को जीने का अधिकार है क्योंकि जीवों में ही शिव बसे हैं। उन्होंने कहा, “वह कैसी मां है जो अपने ही बेटे की बलि ले? अगर मां को बलि चाहिए होगी तो वह खुद ले लेंगी, तुम क्यों काट रहे हो? यदि जीव काट रहे हो तो अपने स्वाद के लिए काट रहे हो।”
खुद को बंगाल और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हम खुद भारत के हैं, स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस के शिष्य व अनुयायी हैं। हम किसी के भोजन पर क्यों बोलेंगे? लेकिन जीव हिंसा पर शास्त्र की बात जरूर बोलेंगे। बलि प्रथा पर बोलना हमारा काम है, किसी को अच्छा लगे या न लगे, हम अपनी बात कहते रहेंगे।
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