Paper Leak Protest: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक मामलों और केंद्र सरकार के हालिया प्रशासनिक फैसलों को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी चूक हुई है तो केवल अधिकारियों के तबादले से काम नहीं चलेगा, बल्कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। एक समाचार एजेंसी से बातचीत में जूली ने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय केवल विभाग बदल रही है।

शिक्षा सचिव की नियुक्ति पर उठाए सवाल

टीकाराम जूली ने कहा कि उच्च शिक्षा सचिव को हटाया नहीं गया, बल्कि उन्हें दूसरे मंत्रालय में भेज दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि नए शिक्षा सचिव के विभाग में पहले सब्सिडी वितरण को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया।

पेपर लीक का मास्टरमाइंड कौन?

जूली ने कहा कि प्रधानमंत्री अब परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कार्रवाई की बात कर रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेपर लीक का असली मास्टरमाइंड कौन है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले के एक आरोपी को अदालत से राहत मिलने की खबरें सामने आई हैं। उनके अनुसार, इससे जांच की दिशा पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, इस मामले पर संबंधित जांच एजेंसियों की प्रक्रिया जारी है।

सोनम वांगचुक को लेकर भी साधा निशाना

कांग्रेस नेता ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले उनके खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए, लेकिन अब केंद्रीय मंत्री उनसे बातचीत कर रहे हैं। टीकाराम जूली ने राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के पुराने बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों को लेकर की गई टिप्पणियों पर अब तक कोई स्पष्टीकरण या माफी नहीं आई है।

बच्चों के भविष्य पर सरकार चुप क्यों रही?

जूली ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के दौरान कई छात्रों ने आंदोलन किए और कुछ युवाओं ने आत्महत्या जैसे कदम भी उठाए। उन्होंने सवाल किया कि सरकार इतने समय तक चुप क्यों रही और अब कार्रवाई की बात क्यों कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में सरकार कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन बाद में कमजोर पैरवी के कारण आरोपी अदालत से छूट जाते हैं।

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