संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हुए हंगामे और कार्यवाही बाधित होने को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। रिजिजू ने एक लेख साझा करते हुए कहा कि संसद न तो सरकार की है और न ही विपक्ष की, बल्कि यह भारत के लोगों की संसद है। उन्होंने कहा कि जनता का जनादेश कोई सजावटी प्रमाणपत्र नहीं है, जिसे बहस के बजाय हंगामा होने पर नजरअंदाज किया जा सके।

संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप

रिजिजू ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही रोकने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल बाधित करना, मंत्रियों की बात न सुनना और बहस के प्रस्तावों को ठुकराने के बाद संसद में चर्चा नहीं होने की शिकायत करना विरोधाभास है।

उन्होंने मॉनसून सत्र के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि लोकसभा निर्धारित समय का करीब 15 प्रतिशत और राज्यसभा करीब 33 प्रतिशत ही चल सकी। रिजिजू के मुताबिक, बार-बार हुए व्यवधानों के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

जंतर-मंतर मामले पर राहुल गांधी को घेरा

रिजिजू ने जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में विस्तृत चर्चा के लिए दोपहर 3 बजे से अगले दिन 3 बजे तक का समय देने का प्रस्ताव रखा था और सवालों के जवाब देने की बात कही थी। रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

राहुल गांधी की संसद में उपस्थिति पर सवाल

रिजिजू ने राहुल गांधी की संसदीय भूमिका पर भी निशाना साधते हुए उनकी 17वीं लोकसभा में 51 प्रतिशत उपस्थिति का दावा किया। उन्होंने कहा कि जो नेता लंबी बहस के प्रस्ताव को ठुकराता है, वह संसद में पर्याप्त समय नहीं मिलने की शिकायत नहीं कर सकता।

रिजिजू ने राहुल गांधी के विदेश दौरों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वे विदेशों में भारतीय लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाते हैं, लेकिन संसद में जवाबदेही तय करने के लिए पर्याप्त रूप से सामने नहीं आते। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने का रास्ता हंगामा नहीं, बल्कि संसद में सार्थक बहस और संवाद है।

बोले- राहुल के निशाने पर सिर्फ हिंदू क्यों ?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के पितृसत्ता खत्म करने’ बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस पार्टी हिंदू परंपराओं को ही निशाना क्यों बनाती है। अल्पसंख्यक महिलाओं की स्थिति पर चुप क्यों रहती है। राहुल अल्पसंख्यक महिलाओं की बात क्यों नहीं करते। वे समाज को न बांटें और बेटियों को कम न आंकें।

राहुल ने शनिवार को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता के मुद्दे पर एक घंटा 16 मिनट बात की थी। मनुस्मृति का जिक्र करते हुए महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच को शर्मनाक बताया।

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