सोहराब आलम, पूर्वी चंपारण। अक्सर जब हम अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई (एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव) के बारे में सुनते हैं, तो हमारे जहन में बुलडोजर, सख्त पुलिस बल और अधिकारियों की सख्ती वाली छवि उभरती है। लेकिन पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड के बोकानेपट्टी गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक कार्यशैली को मानवीय संवेदनाओं का नया आयाम दिया है।
क्या है पूरा मामला?
पताही प्रखंड के बोकानेपट्टी गांव में जिला प्रशासन द्वारा सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया जा रहा था। इस कार्रवाई का नेतृत्व पताही की अंचलाधिकारी (CO) नाज़नी अकरम कर रही थीं। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चल रही इस कार्यवाही के दौरान अफरा-तफरी का माहौल था। उसी समय एक महिला की स्थिति ने अधिकारियों और वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
जब सीओ बनीं मददगार
अतिक्रमण हटाने की आपाधापी में एक महिला अपने छोटे बच्चे को एक हाथ में संभाले हुए थी, जबकि दूसरे हाथ से अपने घर का जरूरी सामान समेटने की कोशिश कर रही थी। नन्हे बच्चे की जिद, सामान का बोझ और ऊपर से सिर पर मंडराते बेघर होने के संकट के बीच वह महिला बुरी तरह परेशान और असहाय दिख रही थी।
इस स्थिति को देखते ही अंचलाधिकारी नाजनी अकरम ने अपनी प्रशासनिक कुर्सी और पद की मर्यादा से ऊपर उठकर एक इंसान होने का परिचय दिया। उन्होंने आगे बढ़कर उस महिला के बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया। सीओ ने न केवल बच्चे को शांत कराया, बल्कि महिला को अपना सामान सुरक्षित रूप से समेटने के लिए पर्याप्त समय और सहयोग भी दिया। इस दौरान उन्होंने उस छोटे बच्चे को प्यार से दुलारते हुए उसे बड़े होकर पढ़-लिखकर एक सफल अधिकारी बनने की प्रेरणा दी, ताकि वह समाज की सेवा कर सके।
बदल रही है प्रशासन की छवि
सीओ नाज़नी अकरम की इस पहल ने न केवल उस परिवार का दिल जीता, बल्कि मौके पर मौजूद ग्रामीणों के बीच भी प्रशासन की एक सकारात्मक छवि पेश की। लोग दबी जुबान में कह रहे थे कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन अगर मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया जाए, तो कठिन परिस्थितियों को भी सहज बनाया जा सकता है। यह घटना साबित करती है कि पद चाहे जो भी हो, संवेदनशीलता इंसान को सबसे अलग और बड़ा बनाती है। फिलहाल, बोकानेपट्टी में चल रही यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन सीओ की इस दरियादिली की तारीफ हर जगह हो रही है।

