सोहराब आलम/पताही/पूर्वी चंपारण। बिहार में सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में पताही प्रखंड के सरैयागोपाल गांव के वार्ड नंबर 9 में प्रशासन का बुलडोजर पूरी तरह से गरजा। अंचलाधिकारी नाजनी अकरम के नेतृत्व में हुई इस बड़ी कार्रवाई में सरकारी सड़क की जमीन पर पिछले 10 सालों से कब्जा जमाए बैठे 13 अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया।
पुलिस छावनी में तब्दील हुआ सरैयागोपाल
आज सुबह जब प्रशासन की टीम जेसीबी मशीनों के साथ गांव में पहुंची तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जैसे ही बुलडोजर ने अपना काम शुरू किया, अवैध कब्जाधारियों के मंसूबे पानी में मिल गए। देखते ही देखते सड़क के किनारे बने 13 पक्के मकान, एस्बेस्टस शेड और खपरैल के ढांचे मलबे में तब्दील हो गए।
एक दशक से जारी था विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, इस सरकारी सड़क पर कब्जे को लेकर विवाद कोई नया नहीं था। पिछले 10 वर्षों से यह मामला स्थानीय स्तर पर उलझा हुआ था। पंचायत और प्रशासनिक स्तर पर कई बार सुलह-समझौते की कोशिशें की गईं, लेकिन कब्जाधारी अपनी जिद पर अड़े रहे। अंततः 2021-22 में अंचल कार्यालय में आधिकारिक रूप से केस दर्ज किया गया। उच्चाधिकारियों से मिले सख्त निर्देश के बाद आज प्रशासन ने बिना किसी सियासी दबाव की परवाह किए इस ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया।
जीरो-टॉलरेंस की नीति
प्रशासन की इस कार्रवाई से वर्षों से अवरुद्ध पड़ी सड़क अब आम जनता के लिए पूरी तरह से अतिक्रमण-मुक्त हो गई है। स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सरकारी संपत्तियों के प्रति अवैध कब्जाधारियों में डर पैदा होगा।
बिहार सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत चल रहा यह बुलडोजर अभियान स्पष्ट संदेश देता है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भी ऐसी किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून का राज हर हाल में स्थापित रहेगा।

