पटना में साइबर थाने की पुलिस ने एक ऐसे शातिर गैंग का पर्दाफाश किया है जो फर्जी सिम और वीआईपी (VIP) मोबाइल नंबरों के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। इस मामले में पुलिस ने नालंदा निवासी अंशु कुमार समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग अब तक करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दे चुका है।

​ऐसे काम करता था ठगों का यह नेटवर्क

​पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी अंशु कुमार ने खुलासा किया कि वह साल 2022 से इस अवैध धंधे में शामिल था। इस गिरोह के सभी सदस्यों के काम अलग-अलग बंटे हुए थे। गैंग का सरगना प्रतोष कुमार है।

  • ​फर्जी सिम का जुगाड़: गिरोह के सदस्य स्थानीय दुकानदारों से संपर्क कर अवैध और फर्जी सिम कार्ड हासिल करते थे।
  • ​VIP नंबरों का इस्तेमाल: आरोपी खास तौर पर ऐसे वीआईपी नंबर लेते थे जो एक्सिस बैंक के कस्टमर केयर नंबर से काफी मिलते-जुलते होते थे। इन नंबरों की शुरुआत ‘8’ अंक से होती थी, जिससे ग्राहक असली और नकली में फर्क नहीं समझ पाते थे।

​नेट बैंकिंग और बैंक सॉल्यूशन के नाम पर लगाते थे चूना

​जब लोग मिलते-जुलते नंबरों को असली बैंक समझकर फोन करते थे, तो ये ठग कॉल सेंटर की तर्ज पर उनसे बात करते थे। नेट बैंकिंग या बैंक खातों से जुड़ी समस्याओं के समाधान का झांसा देकर ये ग्राहकों के बैंक अकाउंट पलक झपकते ही खाली कर देते थे। गिरोह में कोई सिम लेने का काम करता था, कोई सिम मुहैया कराता था, तो कोई कस्टमर केयर बनकर बात करता था और कोई ठगी की रकम निकालता था।

​सीसीएयू (CCSU) टीम की सूचना पर हुई कार्रवाई

​डीएसपी संगीता कुमारी ने बताया कि सीसीएयू (CCSU) टीम से सूचना मिली थी कि ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में कुछ साइबर अपराधी सक्रिय हैं। इस इनपुट के आधार पर सबसे पहले एक आरोपी को पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर नालंदा और पटना में छापेमारी कर अन्य तीन आरोपियों को भी दबोच लिया गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।