कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजधानी स्थित पटना उच्च न्यायालय परिसर आज उस समय ‘जंग का मैदान’ नजर आने लगा, जब अचानक सुरक्षा बलों की गाड़ियां सायरन बजाते हुए दाखिल हुईं। दरअसल, यह कोई वास्तविक हमला नहीं बल्कि बिहार पुलिस की एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) द्वारा आयोजित एक सघन मॉक ड्रिल थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी खतरे या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेना था।
धमकियों के बीच सुरक्षा का कड़ा इम्तहान
पिछले कुछ समय से बिहार के विभिन्न न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। इसी कड़ी में पटना हाई कोर्ट में सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को परखने के लिए यह युद्धाभ्यास किया गया। एटीएस के इस विशेष ऑपरेशन को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और अन्य न्यायाधीशों ने अपनी उपस्थिति में देखा और टीम के रिहर्सल की बारीकियों का अवलोकन किया।
कमांडोज और डॉग स्क्वायड का ‘सर्जिकल एक्शन’
मॉक ड्रिल के दौरान ऐसा माहौल तैयार किया गया जैसे आतंकियों ने हाई कोर्ट परिसर के भीतर कुछ लोगों को बंधक बना लिया हो। सूचना मिलते ही एटीएस के कमांडो एक्शन मोड में आ गए।
- रणनीतिक घेराबंदी: एटीएस की टीम ने पूरे परिसर को चारों तरफ से घेर लिया।
- डॉग और बम स्क्वायड की भूमिका: डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते ने संदिग्ध वस्तुओं की तलाश की और विस्फोटक मिलने की स्थिति में उसे निष्क्रिय करने का सफल अभ्यास किया।
- सफल रेस्क्यू: अत्याधुनिक हथियारों से लैस कमांडोज ने आतंकियों के साथ मुठभेड़ का प्रदर्शन किया और कुशलतापूर्वक बंधकों को आतंकियों के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला।
तैयारियों पर संतोष और भविष्य की रणनीति
इस ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास ही नहीं, बल्कि विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के बीच समन्वय स्थापित करना भी था। मुख्य न्यायाधीश ने एटीएस के जवानों के साहस और त्वरित कार्यवाही की सराहना की। इस मॉक ड्रिल के जरिए यह संदेश दिया गया कि बिहार पुलिस और एटीएस किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को नाकाम करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। हाई कोर्ट जैसे संवेदनशील स्थल पर इस तरह के नियमित अभ्यास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक अभेद्य बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
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