अजय शास्त्री/बेगूसराय/पटना: राजधानी के एक होटल में बेगूसराय की एक छात्रा के साथ कथित दरिंदगी की कोशिश की घटना ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर इस घटना के वायरल होते ही आम लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। न्याय की मांग को लेकर बेगूसराय में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां समाहरणालय के दक्षिणी द्वार पर एकदिवसीय धरना आयोजित किया गया। यह धरना महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान बन गया है।

​बेगूसराय के मान-सम्मान की लड़ाई

​धरना स्थल पर जुटे समाजसेवियों, युवाओं और आम नागरिकों ने एक स्वर में घटना की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिहार में ‘डबल इंजन’ की सरकार होने के बावजूद बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। समाजसेवी संजीव सिंह ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह मामला एक छात्रा का नहीं, बल्कि पूरे बेगूसराय के स्वाभिमान का है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “यदि सरकार अपराधियों पर बुलडोजर चलाने का दावा करती है, तो उस होटल और उसके मालिक पर भी बुलडोजर चलना चाहिए जिसने अपनी जगह का इस्तेमाल ऐसी घिनौनी करतूत के लिए होने दिया।”

​प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

​प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • ​घटना की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच।
  • ​दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई।
  • ​संबंधित होटल प्रबंधन की संलिप्तता की जांच और उस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई।
  • ​धरना स्थल पर मौजूद लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर प्रशासन को जगाने वाले नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, यह लड़ाई जारी रहेगी।

​राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज

​इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों के साथ-साथ नागरिक समाज भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा रहा है। पटना से लेकर बेगूसराय तक इस घटना की गूंज सुनाई दे रही है। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
​फिलहाल, पूरा बेगूसराय और पीड़ित परिवार अब प्रशासन की अगली कार्रवाई की ओर टकटकी लगाए हुए है। क्या सरकार दोषियों पर नकेल कस पाएगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन एक बात तय है बिहार की बेटियां अब चुप बैठने वाली नहीं हैं।