कुंदन कुमार, पटना। पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे पीएचडी धारक बुधवार को अपनी मांगों के समर्थन में उग्र नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने लोकभवन की ओर मार्च निकाला और आर ब्लॉक चौराहे पर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे लंबे समय से उच्च शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं, लेकिन सरकार के नए नियमों के कारण उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। इस आंदोलन को अब विभिन्न राजनीतिक दलों और शिक्षकों का भी समर्थन मिलने लगा है।

​प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें और दर्द

​यूजीसी (UGC) नियमों का पालन: प्रोफेसरों की नियुक्ति में यूजीसी के तय मानकों और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए।

  • आयु सीमा में छूट: अभ्यर्थियों के हित में नियुक्ति प्रक्रिया के लिए उम्र सीमा को बढ़ाया जाए।
  • ​नए नियमों का विरोध: राज्य सरकार की ओर से लाए जा रहे उन नए प्रावधानों को तुरंत वापस लिया जाए, जो अतिथि शिक्षकों के भविष्य के खिलाफ हैं।
  • ​अनिश्चितता का जीवन: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें 11 महीने के अनुबंध पर अतिथि सहायक प्राध्यापक के रूप में रखा गया था, लेकिन वे पिछले 8 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
  • ​राजनीतिक समर्थन: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इन पीएचडी धारकों का समर्थन किया है और सरकार से गेस्ट फैकल्टी को नियुक्ति में प्राथमिकता देने की मांग की है।

​प्रशासनिक सख्ती और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

​लोकभवन मार्च को देखते हुए पटना जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे:

  • ​भारी पुलिस बल की तैनाती: आर ब्लॉक चौराहे से लेकर लोकभवन और राजभवन तक जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर भारी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए।
  • ​आर ब्लॉक पर कड़ा पहरा: अकेले आर ब्लॉक चौराहे पर 100 से अधिक सुरक्षा जवानों को तैनात किया गया था ताकि मार्च को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
  • ​वाटर कैनन का इस्तेमाल: प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए मौके पर वाटर कैनन और अन्य सुरक्षा उपकरण भी तैनात किए गए थे ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।

​पीएचडी होल्डर्स का यह आंदोलन अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने वाले लोग हैं और सरकार उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखाने का प्रयास कर रही है। प्रशासन और पुलिस की सख्ती के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जिससे राजधानी पटना में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल काफी तेज हो गई है।