पटना। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गली-मोहल्लों से लेकर बाजार और मुख्य सड़कों तक स्ट्रीट डॉग लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुके हैं। हालत यह है कि हर दिन औसतन 100 से अधिक लोग कुत्तों के काटने या हमला करने की घटनाओं के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। लगातार बढ़ रही घटनाओं ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है।

मरीजों की लंबी कतार लग रही

सरकारी अस्पतालों के एंटी रेबीज सेंटर में रोजाना मरीजों की लंबी कतार लग रही है। डॉक्टरों के अनुसार गर्मी के मौसम में कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो जाता है, जिससे काटने और हमला करने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार आवारा कुत्ते बाइक सवारों का पीछा करते हैं, जिससे सड़क हादसे भी हो रहे हैं। सुबह और शाम के समय कई इलाकों में कुत्तों के झुंड राहगीरों को दौड़ाते नजर आते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और नौकरीपेशा लोगों में भय का माहौल है।

8366 लोगों को एआरवी वैक्सीन दी गई

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में अप्रैल 2025 से अब तक करीब 2800 मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए पहुंच चुके हैं। अस्पताल में हर दिन औसतन 20 से 30 मरीज इलाज कराने आते हैं। वहीं, आयकर गोलंबर स्थित न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 8366 लोगों को एआरवी वैक्सीन दी गई। वर्ष 2025 में यहां करीब 21 हजार लोगों का वैक्सीनेशन किया गया था।

हालात गंभीर बने हुए हैं

पीएमसीएच में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार हर दिन 75 से 85 मरीज केवल एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए पहुंच रहे हैं। सोमवार को अकेले 84 मरीज अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ता काटने के मामलों में जरा सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि इससे रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा रहता है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कुत्ता काटने पर सबसे पहले घाव को 10 से 15 मिनट तक साबुन और साफ पानी से धोना चाहिए। इसके बाद एंटीसेप्टिक लगाकर तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन लगाने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पालतू या आवारा, किसी भी कुत्ते के काटने पर इलाज में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। लोगों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होने के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है। शहरवासियों ने प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।