चंडीगढ़। पति को जलाकर मारने के प्रयास के गंभीर आरोपों का सामना कर रही महिला को दिए गए भरण पोषण के आदेश पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने लुधियाना की फैमिली कोर्ट के फैसले के क्रियान्वयन पर स्टे देते हुए मामले में नोटिस जारी किया है। फैमिली कोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को महिला की याचिका पर पति को 5000 रुपए प्रतिमाह अंतरिम भरण पोषण देने का आदेश दिया था। इस आदेश को पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
जस्टिस कीर्ति सिंह की पीठ ने पति की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल इस आदेश पर रोक लगा दी।में पति की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 13-14 मई 2020 की रात पत्नी ने सोते समय उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी थी। इस हमले में वह करीब 45% तक झुलस गया।
घटना के बाद उसे अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां वह 4 महीने से अधिक समय तक उपचाराधीन रहा। अब तक उसकी 8 सर्जरी हो चुकी हैं और 9 वीं सर्जरी की सलाह दी गई है। घटना के बाद से हम अलग रह रहे हैं। उसे लगातार विशेष कपड़ों और इलाज की जरूरत है।

पति परिवार का एक मात्र कमाने वाला सदस्य था। लेकिन घटना के बाद वह शारीरिक और आर्थिक रूप से अक्षम हो गया है। इस तरह उसे आर्थिक रुप से भी नुकसान हुआ। पति की ओर से दलील दी गई कि ऐसे गंभीर आरोपों के बीच पत्नी को भरण पोषण देना घिनौने अपराध को पुरस्कृत करने जैसा होगा।
फिलहाल हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश पर रोक लगाकर मामले में अगली सुनवाई के लिए पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। मामले में 15 मई 2020 को एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप है कि पत्नी एक साल से अधिक समय तक फरार रही।
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