लक्ष्मीकांत बंसोड़, बालोद। लौह अयस्क की खदानों से करोड़ों का राजस्व देने वाला बालोद जिले का दल्लीराजहरा आज पेयजल संकट से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई वार्डों के लोग पीने और खाना बनाने के लिए जमीन से रिसने वाले झरिया के पानी पर निर्भर हैं। वहीं 31 करोड़ की जल आवर्धन योजना छह साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी और इसकी लागत बढ़कर 43 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
दरअसल, दल्लीराजहरा के वार्ड 10, 12 और 18 समेत कई इलाकों में नल से पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। लोगों का कहना है कि कई जगह गंदा पानी आता है, इसलिए वे झरना मंदिर के पास जमीन से रिसने वाले पानी को घर ले जाकर पीने और उपयोग करने को मजबूर हैं।

विपक्ष कांग्रेस के पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष रवि जायसवाल का इस मामले में कहना है कि दल्लीराजहरा को झरना दल्ली के नाम से जाना जाता है, लेकिन आज यहां के लोग खुद प्यासे हैं। उनके अनुसार केवल तीन वार्ड ही नहीं, बल्कि पूरे शहर के 27 वार्ड पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल आवर्धन योजना का काम जल्द पूरा नहीं हुआ तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।
नगर पालिका अध्यक्ष का मामले में कहना है कि योजना की राशि 31 करोड़ से बढ़ाकर 43 करोड़ कराई गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पाइपलाइन को भी दोबारा बनाने राशि भी जारी किया गया है और अगले एक वर्ष में योजना पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।

वहीं प्रशासन का कहना है कि यदि लोग वास्तव में झरिया का पानी पी रहे हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। साथ ही योजना में हो रही देरी को लेकर संबंधित विभागों से रिपोर्ट भी मांगी जाएगी।
सवाल यह है कि खदानों से सरकार की तिजोरी भरने वाला दल्लीराजहरा आखिर कब तक बूंद-बूंद पानी के लिए तरसता रहेगा और करोड़ों की जल आवर्धन योजना कब धरातल पर नजर आएगी?
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