Dharm Desk – सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव के एक ऐसे स्वरूप का भी वर्णन मिलता है, जिनका नाम यतिनाथ है? शिव पुराण की शतरुद्र संहिता में यतिनाथ को स्वयं भगवान शिव का अबतार बताया गया है। मान्यता है कि इसी नाम का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर गंगाजल में गुड़ या गन्ने का रस मिलाकर अर्पित करने का उपाय धन से जुड़ी समस्या या किसी बीमारी से परेशानी है तो भोलेनाथ उसके कासन को हर लेते हैं।

यतिनाथ कौन हैं, जानिए पूरी कथा
शिव पुराण बताया गया है अर्बुदाचल पर्वत के समीप आहुक नाम के एक भील और उनकी पत्नी आहुका रहते थे। दोनों भवागन शिव के परम भक्त थे। एक दिन भगवान शिव ने उनकी भक्ति और अतिथि सेवा की परीक्षा लेने के लिए संन्यासी का रूपधारण कर लिया और उनके घर पहुंचे। यही स्वरूप यतिनाथ कहलाया।
आहुक ने अतिथि का सम्मान करते हुए उन्हें कुटिया में ठहराया और स्वयं बाहर जाकर पहरा देने लगा। रात में जंगली पशुओं के हमले में आहुक की मृत्यु हो गई। इसके बाद भी आहुका ने अतिथि सेवा और अपने धर्म से मुंह नहीं मोड़, उसकी निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया। तब दंपति को वरदान दिया। शिव पुराण की कथा में आगे बताया गया है कि आहुक अगले जन्म में राजा नल और आहुका दमयंती बनीं। यतिनाथ शिव बाद में हंस रूप में प्रकट हुए और नल-दमयंती के विवाह में भी भूमिका निभाई।
गंगाजल में गुड़ या गन्ने का रस मिलाकर ऐसे करें अभिषेक
सबसे पहले गंगाजल लें। इसमें थोड़ा सा गुड़ घोल ले। यदि गाने का रस आसनी से मिल सके तो इससे अभिषेक करें इसके बाद गंगाजल से फिर भगवान शिव का अभिषेक करें। शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक यह जल अर्पित करें। अभिषेक करते समय भगवान शिव का ध्यान करें और ओम नमः शिवाय का जप करें। इसके साथ यतिनाथ नाम का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामना भगवान शिव के सामने श्रद्धा भाव के साथ रखें। अभिषेक पूरा होने के बाद शिवbलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित कर बेल पत्र और पुष्प आदि चढ़ाएं।
धार्मिक परंपरा में गन्ने के रस और गुड़ को मधुरता से जोड़कर देखा जाता है, शिव पूजा में इनके अर्पण की परंपरा भी मिलती है। साबन में इस प्रकार की पूजा करते समय सवसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, शुद्धता और भगवान शिव के प्रति समर्पण है। इसलिए इस सावन के इस पवित्र महीने में यदि आप भगवान शिव का विशेष पूजन करना चाहते हैं तो यतिनाथ स्वरूप का स्मरण करते हुए गंगा जल में गुड़ या गन्ने का रस मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद महादेव से सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।

