वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के शासकीय विद्यालयों में प्रतिदिन सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र, शांति मंत्र एवं भोजन मंत्र की अनिवार्यता को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने आदेश को असंवैधानिक घोषित कर निरस्त किए जाने तथा उसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की प्रार्थना की है।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता डॉ. आमिर ख़ान ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि उक्त आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 की भावना के विपरीत है, जो राज्य द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक अनुष्ठानों के संचालन पर प्रतिबंध लगाता है। इसके अतिरिक्त यह आदेश अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (गरिमामय जीवन का अधिकार) तथा अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) से प्रदत्त संवैधानिक संरक्षण को भी प्रभावित करता है।
“विद्यालय शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों का केंद्र होना चाहिए, न कि किसी विशेष धार्मिक परंपरा के प्रचार का माध्यम। संविधान प्रत्येक नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता और राज्य की धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करता है। हमारा उद्देश्य किसी धर्म का विरोध नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता तथा सभी विद्यार्थियों के समान अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।”
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